शंभू बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों ने ऐलान किया कि रविवार तक अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वह लोग सोमवार को दिल्ली कूच करेंगे। किसान आंदोलन का रविवार को छठवां दिन है।

Kisan Andolan on MSP Guarantee: हजारों की संख्या में किसान दिल्ली कूच के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। कई दिनों से शंभू बॉर्डर पर डेरा डाले किसानों ने ऐलान किया कि रविवार तक अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वह लोग सोमवार को दिल्ली कूच करेंगे। किसान आंदोलन का रविवार को छठवां दिन है।

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दरअसल, एमएसपी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर पिछले काफी दिनों से किसान आंदोलित है। सरकार की ओर से मांगे पूरी नहीं किए जाने के बाद किसानों ने एक सप्ताह पहले दिल्ली कूच का ऐलान किया था। 13 फरवरी को हजारों की संख्या में दिल्ली कूच के लिए किसान निकले। किसानों को रोकने के लिए हजारों की संख्या में पुलिस फोर्स और पैरामिलिट्री दिल्ली के सभी बॉर्डर्स पर सरकार ने तैनात कर दिया था। किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड्स और सड़कों पर कील-कांटे बिछा दिए गए थे। दिल्ली के लिए निकले किसानों पर मंगलवार को जगह-जगह झड़प हुई, पुलिस ने कई जगह लाठी चार्ज भी किया।

किसानों के दिल्ली कूच के बीच लगातार वार्ता विफल

उधर, किसानों के दिल्ली कूच के पहले दो राउंड की वार्ता विफल हो गई थी। सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच यह वार्ता, एमएसपी गारंटी को लेकर हो रही है। किसान एमएसपी की गारंटी चाहता है।

शंभू बॉर्डर पर डटे हुए किसान

किसान छह दिनों से शंभू बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान, अपनी मांगे पूरी होने की उम्मीद लिए यहां बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। किसान प्रतिनिधियों के साथ सरकारी प्रतिनिधिमंडल की एक और वार्ता रविवार को शाम साढ़े पांच बजे प्रस्तावित है। उस वार्ता में अगर किसानों की मांगों को लेकर कोई सहमति नहीं बनी तो किसान सोमवार को अपना निर्णय ले सकेंगे। किसान नेताओं ने ऐलान किया कि रविवार तक सरकार नहीं मानी तो वे लोग सोमवार को दिल्ली कूच करेंगे।

किसानों की क्या है मांग?

हरियाणा-पंजाब के किसान कई मांगों को लेकर दिल्ली कूच करने के लिए शंभू बॉर्डर सहित दिल्ली के सभी बॉर्डर्स पर पिछले छह दिनों से डटे हुए हैं। किसान, सरकार से एमएसपी गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने और किसान ऋण माफ करने के लिए आंदोलित हैं। अन्य प्रमुख मांगें बिजली अधिनियम 2020 को निरस्त करना, यूपी के लखीमपुर खीरी में मारे गए किसानों के लिए मुआवजा और पिछले विरोध में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस मामले वापस लेना हैं। हजारों की संख्या में किसान इस बार फिर तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने तक हुए आंदोलन की तरह डटने के लिए घर से निकले हैं।

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