देश में इस समय कोरोना संक्रमण को रोकने युद्धस्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। इस बीच एनआईवी, आईसीएमआर और भारत बायोटेक से जुड़े शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के बाद दावा किया है कि कोरोना के डेल्टा और बीटा वेरिएंट्स पर कोवैक्सिन अधिक असरकारक है। यह शोध  biorxiv नामक वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है।

हैदराबाद. कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में युद्धस्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच सरकार वैक्सीनेशन को जल्द से जल्द मुकाम तक पहुंचाना चाहती है। इस बीच राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान(NIV),भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारत बायोटेक से जुड़े शोधकर्ताओं ने कोवैक्सिन को लेकर एक शोध किया है। इसमें दावा किया है कि कोरोना के डेल्टा और बीटा वेरिएंट पर कोवैक्सिन अधिक असरकारक है। यह शोध biorxiv नामक वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है। बता दें इन तीनों संस्थाओं ने ही कोवैक्सिन ईजाद की है।

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डेल्टा को भारतीय वेरिएंट माना जाता है
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से देश को झकझोरकर रख दिया है। हालांकि अब केस कम हो रहे हैं, लेकिन अप्रैल से लेकर मई तक जिस तरह तरह केस बढ़े और मौतें हुईं, उसने सबको हिलाकर रख दिया। देश में अब तक 2.90 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 2.74 करोड़ लोग ठीक हो चुके हैं। देश में अब तक 3.53 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना के कई नए वेरिएंट्स सामने आ चुके हैं। इनमें बीटा (बी.1.351) को दक्षिण अफ्रीकी, जबकि डेल्टा (बी.1.617.2) वेरिएंट को आमतौर पर भारतीय वेरिएंट के रूप में पहचान दी गई है।

एंटीबॉडी को बनाए रखने में मददगार है कोवैक्सिन
शोध में सामने आया कि कोवैक्सिन बीटा और डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ न्यूट्रलाइजेशन टाइटर्स (एंटीबॉडी को बेअसर करने की एकाग्रता) में तीन गुना कमी ला देता है। यानी यह इन दोनों वेरिएंट के विरुद्ध एंटीबॉडी बनाए रखता है।

50 गुना तेजी से फैलता है डेल्टा
विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार, कोरोना के नए वेरिएंट बी.1.617.1 और बी.1.617.2 को क्रमश: 'कप्पा' और 'डेल्टा' का नाम दिया गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि डेल्टा वेरिएंट अल्फा से कहीं अधिक घातक है। यानीअल्फा (बी.1.1.7) वेरिएंट की तुलना में डेल्टा (बी.1.617.2) 50 फीसदी तेजी से फैलता है। पिछले साल अक्टूबर में भारत में पाए जाने वाले स्ट्रेन (B.1.617.1) को 'कप्पा' नाम दिया गया था। माना जा रहा है कि इस साल डेल्टा वेरिएंट के कारण ही देश में सबसे अधिक मौतें हुईं और संक्रमण तेजी से फैला।

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