कर्नाटक के मंदिरों में ऑनलाइन सेवा की शुरुआत की गई है। इससे भक्त मंदिर गए बिना भगवान के दर्शन करने और अपने घर प्रसाद मंगाने की सुविधा का लाभ ले रहे हैं। भक्त ऑनलाइन पेमेंट द्वारा दान भी कर रहे हैं। 

मंगलुरु। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के मंदिरों ने ऑनलाइन लेन-देन की दुनिया में कदम रखा है। भक्तों को ऑनलाइन प्रसाद या ई-सेवा करने की अनुमति दी गई है। कर्नाटक में कई मंदिरों का स्वामित्व और प्रबंधन राज्य सरकार के बंदोबस्ती विभाग द्वारा किया जाता है। बंदोबस्ती विभाग ने भक्तों के लिए ऑनलाइन प्रार्थना और प्रसाद पाने संबंधी ऑनलाइन सेवाएं शुरू की हैं।

ऑनलाइन सर्विस से भक्त मंदिरों में गए बिना अपनी पसंद के मंदिर या देवता की सेवा कर सकते हैं। भक्त मंदिरों में कतारों में लगने के बदले ई-सेवा का आसान तरीका चुन सकते हैं। ई-सेवा प्रसाद के माध्यम से उनके घर तक मंदिरों का प्रसाद पहुंचाया जा रहा है। आधुनिक समय के भक्त दूर से ही अपनी पसंद के देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्रार्थना करने और ई-सेवा करने का विकल्प चुन सकता है।

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ई-सेवा और ई-कनिक्के (दान) राज्य में बंदोबस्ती विभाग के सभी ए 'श्रेणी के मंदिरों में उपलब्ध हैं। खासकर दक्षिण कन्नड़ जिले में जो कई प्रसिद्ध मंदिरों के लिए जाना जाता है। हाल ही में नवरात्रि समारोह के दौरान मंगलादेवी मंदिर में ई-हुंडी सुविधा शुरू की गई थी। मंगलुरु दशहरा के भाग के रूप में समारोह के दौरान बड़ी संख्या में लोग दक्षिण कन्नड़ के मंदिरों में उमड़ते हैं।

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ई-हुंडियों के माध्यम से मिल रहा दान
बंदोबस्ती विभाग अपने शासित अन्य मंदिरों में भी ई-हुंडी सुविधा लागू करने की तैयारी में है। सूत्रों ने कहा कि जिले में उनके द्वारा संचालित पांच मंदिरों में यह सुविधा पहले ही शुरू की जा चुकी है और प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। जिले के कुक्के सुब्रह्मण्य मंदिर में दो महीने पहले ई-हुंडी सुविधा शुरू की गई थी। विभिन्न मौसमों के दौरान मंदिर में भीड़ के आधार पर, मंदिर को ई-हुंडियों के माध्यम से एक दिन में लगभग 6,000 से 25,000 रुपए मिलते हैं।

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