भारत-चीन सीमा पर चमोली जिले की मलारी घाटी में ग्लेशियर टूटने का मामला सामने आया है। चूंकि यहां आबादी नहीं है, सिर्फ सेना की आवाजाही रहती है, इसलिए अभी किसी नुकसान के बारे में पता नहीं चल पाया है। घटना शुक्रवार की है। घटना का आकलन करने जोशीमठ से सीमा सड़क संगठन की एक टीम मौके पर रवाना हो चुकी है। चूंकि इस समय वहां लगातार बारिश हो रही है और बर्फबारी भी, इसलिए उसे पहुंचने में वक्त लग सकता है।
चमोली, उत्तराखंड. भारत-चीन सीमा पर चमोली जिले की मलारी घाटी में ग्लेशियर टूटने का मामला सामने आया है। चूंकि यहां आबादी नहीं है, सिर्फ सेना की आवाजाही रहती है, इसलिए अभी किसी नुकसान के बारे में पता नहीं चल पाया है। घटना शुक्रवार की है। घटना का आकलन करने जोशीमठ से सीमा सड़क संगठन(BRO) की एक टीम मौके पर रवाना हो चुकी है। चूंकि इस समय वहां लगातार बारिश हो रही है और बर्फबारी भी, इसलिए उसे पहुंचने में वक्त लग सकता है। बता दें कि बॉर्डर पर सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है।
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यह भी जानें
- घटनास्थल जोशीमठ से करीब 90 किमी दूर सुमना नामक स्थल पर है। चूंकि यह जगह बेहद दुर्गम है, इसलिए वहां तक पहुंचने में काफी समय लगता है। बॉर्डर पर भारत की अंतिम चौकी बाड़ाहोती तक यहीं से पहुंचा जाता है। चूंकि यहां संचार माध्यम नहीं है, इसलिए संपर्क नहीं हो पाया है। चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी के अनुसार, बीआरओ के कमांडर मनीष कपिल के नेतृत्व में एक टीम वहां के लिए रवाना हुई है। चूंकि वहां सड़क बन रही है, इसलिए मजदूरों के फंसे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। बता दें कि यहां लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण ऋषिगंगा और धौलीगंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इस वजह से तपोवन और रैणी के साथ छह गांवों के लोगों में डर बैठा हुआ है। बता दें कि 7 फरवरी को ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा में आई बाढ़ में 205 लोग लापता हो गए थे। इनमें से 79 शव ही मिल पाए हैं।
