चीन-पाकिस्तान की चुनौतियों के बीच भारत सरकार सेना की ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है। 1.5 लाख करोड़ रुपए के रक्षा सौदों से लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां, हेलीकॉप्टर और तोपें खरीदी जाएंगी।

नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से मिल रही चुनौती को देखते हुए भारत सरकार सेनाओं की क्षमता बढ़ाने पर खास ध्यान दे रही है। इसी क्रम में सेनाओं की क्षमता बढ़ाने की दीर्घकालिक योजना के तहत 31 मार्च को समाप्त होने वाले इस वित्त वर्ष से पहले लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों और तोपों के लिए कम से कम चार बड़े रक्षा सौदों पर साइन किए जा सकते हैं। इनकी कुल कीमत 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक होगी।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

TOI की रिपोर्ट के अनुसार सबसे पहले फ्रांस के साथ 26 राफेल एम फाइटर जेट की सीधी खरीद के लिए लगभग 63,000 करोड़ रुपए की डील होगी। इन विमानों को स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा। 22 राफेल विमान एक सीट वाले और 4 दो सीट वाले होंगे। दो सीट वाले विमानों का इस्तेमाल पायलटों को ट्रेनिंग देने में होगा। इसके साथ ही मिसाइल, सिमुलेटर और क्रू ट्रेनिंग भी मिलेगी। भारतीय वायु सेना पहले से फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल विमानों का इस्तेमाल कर रही है। इनके कलपुर्जों की खरीद भी होगी। इस सौदे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) से अंतिम मंजूरी मिलनी है।

स्कॉर्पीन डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां खरीदेगा भारत

फ्रांस के साथ एक अन्य प्रमुख सौदा 38 हजार करोड़ रुपए का होगा। इसमें तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां खरीदी जाएंगी। इनमें पानी के भीतर अधिक समय तक टिकने के लिए एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) की सुविधा होगी। इन पनडुब्बियों को मुंबई स्थित मझगांव डॉक्स (एमडीएल) में बनाया जाएगा।

पहली पनडुब्बी 2031 तक बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद एक-एक साल के अंतराल पर दो और पनडुब्बी नौसेना को मिलेगी। एमडीएल में 23,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के 'प्रोजेक्ट-75' के तहत पहले से छह स्कॉर्पीन या कलवरी क्लास की सबमरीन बनाई गई है। इस प्रोजेक्ट की छठी पनडुब्बी 'वाग्शीर' को गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर सूरत और स्टील्थ फ्रिगेट नीलगिरी के साथ 15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कमीशन किया जाना है।

156 प्रचंड हेलीकॉप्टरों की होगी खरीद

दो और बड़े रक्षा सौदे प्रचंड हेलीकॉप्टर और तोप के लिए होंगे। 53 हजार करोड़ रुपए की लागत से 156 प्रचंड हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे। यह स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर है। कम वजन के चलते इसे ऊंचे पहाड़ी इलाकों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही 8,500 करोड़ रुपए की लागत से 307 स्वदेशी एडवांस टो आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) खरीदे जाएंगे। इसे DRDO ने डिजाइन और विकसित किया है। इसकी मारक क्षमता 48 किलोमीटर तक है। तोप का उत्पादन भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स द्वारा किया जाएगा।

156 नए प्रचंड हेलीकॉप्टर में से 90 सेना और 66 वायुसेना को मिलेंगे। ये हेलीकॉप्टर सियाचिन ग्लेशियर और पूर्वी लद्दाख जैसे बहुत अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लड़ाई कर सकते हैं। इन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाया जाता है।