भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अगले महीने ISS के लिए उड़ान भरेंगे। यह 40 साल बाद अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय होंगे। शुक्ला एक निजी मिशन पर जा रहे हैं जिसके लिए भारत ने ₹512 करोड़ का भुगतान किया है।

Indian Astronaut Shubhanshu Shukla: भारत के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अगले महीने ISS (International Space Station) के लिए उड़ान भरेंगे। केंद्रीय स्पेस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "अगले महीने एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन पर जाएगा। भारत अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक निर्णायक अध्याय लिखने के लिए तैयार है।"

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शुभांशु शुक्ला पिछले आठ महीनों से नासा और निजी अंतरिक्ष कंपनी एक्सिओम स्पेस (Axiom Space) के साथ ट्रेनिंग ले रहे हैं। वह निजी वाणिज्यिक मिशन पर आईएसएस के लिए उड़ान भरेंगे। इसके लिए भारत ने 60 मिलियन डॉलर (512 करोड़ रुपए) से अधिक का भुगतान किया है। मिशन को SpaceX Falcon 9 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। चार लोगों का दल SpaceX Crew Dragon कैप्सूल में सवार होगा। यह अमेरिका के फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा।

ग्रुप कैप्टन शुक्ला 40 साल के हैं। ISRO (Indian Space Research Organisation) ने इस मिशन के लिए अपने सबसे युवा अंतरिक्ष यात्री को चुना है। उनके सामने एक लम्बा करियर है।

Axiom-4 (Ax-4) मिशन की कमांडर नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन होंगी। वह अब एक्सिओम स्पेस के लिए काम करती हैं। अन्य दो क्रू मेंबर पोलैंड के स्लावोज उज़्नान्स्की हैं। वह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री हैं और मिशन विशेषज्ञ होंगे। हंगरी के टिबोर कापू की भी यही भूमिका होगी। ग्रुप कैप्टन शुक्ला मिशन के पायलट होंगे।

4 दशक बाद अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने वाले पहले भारतीय होंगे ग्रुप कैप्टन शुक्ला

ग्रुप कैप्टन शुक्ला पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं जो ISS जाने वाले हैं। राकेश शर्मा की 1984 में सोवियत सोयुज अंतरिक्ष यान पर उड़ान के बाद चार दशकों से अधिक समय में अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुक्ला होंगे।

शुक्ला भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्हें इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (HSP) के तहत चुना गया था। उन्हें गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष भेजा जाना है। गगनयान मिशन भारत द्वारा इंसान को अंतरिक्ष में पहली बार भेजे जाने का मिशन है। एक्स-4 मिशन पर उनकी यात्रा से अंतरिक्ष उड़ान संचालन, लॉन्च प्रोटोकॉल, माइक्रोग्रैविटी अनुकूलन और आपातकालीन तैयारियों में महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुभव मिलने की उम्मीद है। इससे इसरो को गगनयान मिशन में मदद मिलेगी।