यह भयानक गलती कोलकाता और भुवनेश्वर जाने वाले इंडिगो (Indigo) के दो विमान ग्राउंड स्टाफ की मामूली गलती के कारण हवा में लगभग 3,000 फीट की ऊंचाई पर टकराने की नौबत आ गई। 

नई दिल्ली। यूएई (UAE) के बाद अब भारत में एक बड़ा विमान हादसा होते होते बचा है। आसमान में 3000 फीट की ऊंचाई पर दो विमान आपस में टकराने से बचे। दोनों विमानों में 426 लोग सवार थे। रडार कंट्रोलर (Radar Controller) ने दोनों विमानों को टकराने से बचा लिया। घटना सात जनवरी 2022 की है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और इंडिगो एयरलाइन (Indigo Airlines) के खिलाफ डीजीसीए (DGCA) ने जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह भयानक गलती कोलकाता और भुवनेश्वर जाने वाले इंडिगो (Indigo) के दो विमान ग्राउंड स्टाफ की मामूली गलती के कारण हवा में लगभग 3,000 फीट की ऊंचाई पर टकराने की नौबत आ गई।

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यह है मामला

इंडिगो की फ्लाइट 6E455 ने बेंगलुरु से कोलकाता और 6E246 ने बेंगलुरु से भुवनेश्वर के लिए एक ही दिशा में एक साथ उड़ान भरी थी। दोनों विमान खतरनाक ढंग से एक-दूसरे के करीब आ गए थे। बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट के ऊपर हवाई क्षेत्र की निगरानी कर रहे रडार कंट्रोलर लोकेंद्र सिंह ने दोनों विमानों को देखा और उन्होंने दोनों विमानों को अपनी दिशा बदलने को कहा। हवाई अड्डे के उत्तर और दक्षिण रनवे का एक साथ प्रस्थान के लिए उपयोग नहीं किया जाता है क्योंकि समान दूरी से उड़ान भरने वाले विमान एक दूसरे के साथ टकरा सकते हैं। बेंगलुरु एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले दोनों विमान एयरबस A320 मॉडल के थे।

रिपोर्टों में कहा गया है कि सुबह उत्तरी (नॉर्थ) रनवे का इस्तेमाल प्रस्थान यानी डिपार्चर के लिए किया जा रहा था जबकि दक्षिण (साउथ) रनवे को आगमन के लिए तय किया गया था। बाद में दक्षिण रनवे को शिफ्ट प्रभारी द्वारा बंद करने का निर्णय लिया गया लेकिन साउथ टावर के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को इसकी जानकारी नहीं दी गई। साउथ टावर कंट्रोलर ने बेंगलुरु जा रही फ्लाइट को टेकऑफ की मंजूरी दे दी। इसी वक्त नॉर्थ टावर कंट्रोलर ने भी बेंगलुरु जा रही फ्लाइट को उड़ान की मंजूरी दे दी। DGCA की रिपोर्ट के मुताबिक नॉर्थ और साउथ टावर कंट्रोलर्स ने आपसी बातचीत के बिना फ्लाइट क्लियरेंस दे दिया था। 

क्यों आई यह नौबत?

यह घटना हवाई यातायात नियंत्रकों (एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स) के बीच गैप का नतीजा थी। इसके अलावा एएआई और इंडिगो द्वारा डीजीसीए को इसकी रिपोर्ट करने में विफलता भी चिंता पैदा करती है। नियमित निगरानी के दौरान इस घटना का पता चला। कोलकाता जाने वाली उड़ान में 176 यात्री और चालक दल के छह सदस्य थे। जबकि भुवनेश्वर की उड़ान में 238 यात्री और चालक दल के छह सदस्य थे। दोनों विमानों में कुल 426 यात्री थे।

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