भारतीय टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच दरारें आने से हिमालय के पर्वतीय इलाकों में भूकंप की घटनाएं बढ़ गई हैं। इस कारण हिमालय की ऊंचाई भी बढ़ रही है। जानें क्या है टेक्टोनिक प्लेट्स और इसका प्रभाव। 

नेशनल डेस्क। हिमालय पर्वत की ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ रही है। सुनकर हैरान हो गए न लेकिन ये खुशी की बात नहीं बल्कि चिंता का विषय है। हिमालय क्षेत्र में भूकंप की गतिविधियों के बढ़ने से वहां जमीन में दरारें आने एक तरफ हिमालय की ऊंचाई कम और दूसरी तरफ बढ़ने लगी है।

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इसकी वजह ये है कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट पृथ्वी की सतह में जाकर टूट रही है। टेक्टोनिक प्लेट्स के टूटने से हिमालय क्षेत्र में लगातार बढ़ रही दरारों से भौगोलिक परिस्थितियों में भी काफी परिवर्तन हो जाएगा। ऐसा हुआ तो तिब्बत भी दो भागों में बंट जाएगा। इसे लेकर तिब्बत सरकार भी परेशान है।

क्या होती है टेक्टोनिक प्लेट्स
पृत्थी का बाहरी आवरण काफी ठोस होता है और ये कई सारे बड़े टुकड़ों से बना होता है इसे ही टेक्टोनिक प्लेट कहा जाता है। ये प्लेट ठोस चट्टान की तरह बड़ा और कई सारी पर्तों में बना होता है और काफी टाइट जुड़ा होता है। ये भी जरूरी नहीं है कि सभी प्लेट्स एक ही जगह पर अटकी हों। 

क्या कहते हैं वैज्ञानिक
वैज्ञानिकों का कहना है कि भारती टेक्टोनिक प्लेट्स के नीचे का हिस्सा 200 किमी गहरा है जबकि कुछ जगह यह 100 किमी गहरा है। ऐसे में साफ है कि हिमालय के पूरे हिस्से की गहराई में अंतर है। इससे पता चलता है कि हिमालय क्षेत्र में भूकंप के जल्दी प्रभाव के कारण दरारें बढ़ रही हैं। यह दरारें ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते एफेक्ट के काऱण भी हो सकता है।