दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन और वेदांता ने पिछले साल पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले प्रोडक्शन प्लांट स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

Foxconn cancelled Vedanta deal of semiconductor plant: भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना को ताइवान की कंपनी के ऐन वक्त पर पीछे हट जाने से झटका लगा है। ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन ने वेदांता के साथ 19.5 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की डील से हाथ खींच लिया है। दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन और वेदांता ने पिछले साल पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले प्रोडक्शन प्लांट स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, भारत सरकार ने कहा कि फॉक्सकॉन के डील से पीछे हटने से देश के चिप निर्माण प्लान पर कोई असर नहीं होगा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को कहा कि वेदांता के साथ संयुक्त उद्यम से फॉक्सकॉन के हटने से भारत के सेमीकंडक्टर फैब लक्ष्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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बिना कारण बताए फॉक्सकॉन ने कहा-वेदांता के साथ ज्वाइंट वेंचर को आगे नहीं बढ़ा सकते

फॉक्सकॉन ने वेदांता के साथ गुजरात में लगाए जाने वाले सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से पीछे हटने की वजहों को विस्तार से नहीं बताया है। ताइवान की कंपनी ने कहा कि फॉक्सकॉन ने तय किया है कि वह वेदांता के साथ ज्वाइंट वेंचर पर आगे नहीं बढ़ेगा। वह अपने नाम को ज्वाइंट वेंचर से हटाने की प्रॉसेस में है। पिछले साल दोनों कंपनियों ने 19.5 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए में ये डील साइन की थी। इस डील के तहत वेदांता और फॉक्सकॉन मिलकर भारत के गुजरात में सेमीकंड्क्टर और डिस्प्ले प्रोडक्शन प्लांट लगाने वाले थे।

केंद्रीय मंत्री बोले-नहीं होगा कोई असर

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को कहा कि वेदांता के साथ संयुक्त उद्यम से फॉक्सकॉन के हटने से भारत के सेमीकंडक्टर फैब लक्ष्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने एक ट्वीट के जरिये कहा, ‘वेदांता के साथ संयुक्त उद्यम से हटने के फॉक्सकॉन के इस निर्णय का भारत के सेमीकंडक्टर फैब लक्ष्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’ उन्होंने कहा कि फॉक्सकॉन और वेदांता दोनों का भारत में महत्वपूर्ण निवेश है और वे मूल्यवान निवेशक हैं जो रोजगार पैदा कर रहे हैं और विकास कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सब जानते कि दोनों कंपनियों के पास सेमीकॉन का कोई पूर्व अनुभव या प्रौद्योगिकी नहीं थी और उनसे टेक पार्टनर से फैब तकनीक प्राप्त करने की अपेक्षा की गई थी। जबकि उनके संयुक्त उद्यम वीएफएसएल द्वारा मूल रूप से 28 एनएम फैब के लिए एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, उनको उस प्रस्ताव के लिए उपयुक्त टेक पार्टनर नहीं मिल पाया।

वेदांता ने वीएफएसएल के माध्यम से हाल ही में एक बड़ी ग्लोबल सेमीकॉन कंपनी से टेक लाइसेंसिंग समझौते द्वारा समर्थित 40एनएम फैब का एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, जिसका सेमीकॉन इंडिया तकनीकी सलाहकार समूह द्वारा इस समय मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दो निजी कंपनियां क्यों या कैसे साझेदार बनने का चयन करती है या नहीं करती हैं, उसमें शामिल होना सरकार का काम नहीं है। सरल शब्दों में कहें तो दोनों कंपनियां स्वतंत्र रूप से भारत में अपनी रणनीतियों को आगे बढ़ा सकती हैं और सेमीकॉन एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में उचित प्रौद्योगिकी साझेदार के साथ आगे बढ़ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार द्वारा भारत की सेमीकॉन रणनीति और नीति को मंजूरी देने के बाद 18 महीनों में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को उत्प्रेरित करने की भारत की रणनीति में तेजी से प्रगति देखी गई है। जो लोग फॉक्सकॉन/वेदांता के इस फैसले को भारत की सेमीकॉन महत्वाकांक्षा के लिए ‘झटका’ बता रहे हैं, उनके लिए मैं केवल इतना ही कह सकता हूं कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति के खिलाफ दांव लगाना खराब इरादा है।

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