पीएम मोदी की युवाओं को माफ करने की बात पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि माफी उसके लिए होती है जिससे कोई शिकायत हो, तो बच्चों से क्या शिकायत थी? पीएम ने जंतर-मंतर पर हुई घटना का जिक्र कर युवाओं को माफ करने की बात कही थी।
नई दिल्ली [भारत], 2 अगस्त (एएनआई): वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने युवाओं से गलतियों से सीखकर आगे बढ़ने की अपील की थी। खुर्शीद ने पूछा कि आखिर यह 'शिकायत' किसके खिलाफ है।
एएनआई से बात करते हुए खुर्शीद ने कहा कि माफी किसी के प्रति शिकायत होने से जुड़ी है और उन्होंने युवाओं को माफी की जरूरत वाले के रूप में वर्णित करने के आधार पर सवाल उठाया। खुर्शीद ने कहा, "पहले यह स्थापित होना चाहिए कि उनकी शिकायत वास्तव में किसके खिलाफ है? आप उसे माफ करते हैं जिससे आपको कोई शिकायत हो। तो, बच्चों के खिलाफ ऐसी क्या शिकायत थी कि उन्हें माफ किया जा रहा है?... सिर्फ यह कहना कि 'हमने उन्हें माफ कर दिया' गलत होगा, क्योंकि इसका मतलब है कि आपने स्वीकार कर लिया है कि वे दोषी थे और आप उन्हें माफ कर रहे हैं।"
क्या कहा था प्रधानमंत्री मोदी ने?
खुर्शीद की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करते हैं और उनसे अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ने का आग्रह करते हैं। पीएम मोदी ने कहा था, "आज मेरा मन बस आपसे बात करने का कर रहा है। जंतर-मंतर पर जो हुआ, वह देश और दुनिया ने देखा। कुछ शरारती बच्चों ने बहुत ही भद्दी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, ऐसे शब्द जो किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देते। मुझे व्यक्तिगत रूप से गाली दी गई, और मेरी दिवंगत मां को भी अपशब्द कहे गए। यह वास्तव में एक बहुत ही भद्दा दृश्य था।"
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, मैं इस तथ्य के बारे में बात करना चाहता हूं कि बचपन में गलतियां होती हैं, और बचपन उन गलतियों को सुधारने का अवसर भी देता है; यह युवा होने का स्वभाव है। इसलिए, मैं समाज के भीतर के आक्रोश को पूरी तरह से समझ सकता हूं। हमारी बेटियों को ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते देखना एक सांस्कृतिक झटके जैसा है। फिर भी, अब समय इन बच्चों को गले लगाने और उन्हें सही रास्ता दिखाने का है। वे अपना रास्ता भटक गए हैं, और उन्हें मार्गदर्शन देना हमारा कर्तव्य है।"
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि युवाओं को दंडित करने, उन्हें अदालती कार्यवाही में घसीटने और उन्हें सामाजिक उत्पीड़न का शिकार बनाने से स्थिति का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा, "मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। समाज को भी इसे स्वीकार करना चाहिए। मेरे दिल में केवल एक ही भावना है। कभी-कभी, हमारी जीभ हमारे दांतों के बीच आ जाती है और खून बहने लगता है, फिर भी हम अपने दांत नहीं तोड़ते; आखिर, दांत और जीभ दोनों हमारे ही हैं। ये बच्चे भी हमारे हैं। उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग भटक गए हैं उनका मार्गदर्शन करना मुश्किल है, "लेकिन यह एक ऐसा काम है जिसे हमें करना ही चाहिए।" (एएनआई)
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