Asianet News HindiAsianet News Hindi

लखीमपुर हिंसा: NCP लीडर शरद पवार ने कर दी इसकी जलियांवाला कांड से तुलना; सरकार किसानों की आवाज दबा रही

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा को लेकर Politics चरम पर है। इसे लेकर नेताओं के लगातार बयान आ रहे हैं। अब NCP लीडर शरद पवार ने एक विवादास्पद बयान दिया है।

Lakhimpur violence, Sharad Pawar controversial statement
Author
Lucknow, First Published Oct 6, 2021, 7:35 AM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के काफिले को काले झंडे दिखाते समय हुई हिंसा को लेकर Politics चरम पर है। इस हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले पर अब NCP लीडर शरद पवार का भी बयान सामने आया है।

यह भी पढ़ें-लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद Political ड्रामा; प्रियंका के हाथ में झाड़ू देख और राहुल के tweet पर भड़के लोग

लखीमपुर की घटना की जलियांवाला हत्याकांड से तुलना
NCP नेता शरद पवार ने लखीमपुर में हुई घटना की तुलना जलियांवाला कांड से की है। उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग में जैसी स्थिति थी, वैसी ही आज उत्तर प्रदेश में हो गई है। पवार ने चेतावनी दी कि किसान इसे भूलेगा नहीं। केंद्र सरकार को इससे पनपे असंतोष का सामना करना ही पड़ेगा। NCP लीडर ने इस मामले की जांच एक रिटायर्ड जज के बजाय मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के जज से कराने की मांग उठाई। पवार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आवाज दबा रही है, लेकिन वो इसमें सफल नहीं होगी। NCP लीडर ने किसानों का साथ देने का ऐलान किया।

यह भी पढ़ें-Lakhimpur हिंसा पर सपा हंसी, तो फंसी: PM मोदी पर अखिलेश ने किया tweet, सामने आए चौंकाने वाले रिएक्शन

चीफ जस्टिस को लिखा पत्र
इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI से कराने की मांग को लेकर दो वकीलों ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। वकील शिवकुमार त्रिपाठी और सीएस पांडा ने पत्र में कहा कि हाल के दौर में हिंसा देश में राजनीति संस्कृति बन गई है। इसकी गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी सामने आई थी। इसमें कहा था कि ऐसी घटनाएं होती हैं, तो कोई जिम्मेदारी लेने का तैयार नहीं होता है।

यह भी पढ़ें-लखीमपुर हिंसा पर ममता ने यूपी को बताया किलिंग राज्य, सुवेंदु ने बंगाल को कहा- 'किलिंग हब'

गोली लगने से मौत महज अफवाह
इस बीच प्रशासन ने इसे अफवाह बताया, जिसमें कहा गया कि घटना के समय गोली चलाई गई, इससे एक किसान की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी 8 लोगों की मौत की वजह गाड़ी के साथ घिसटने, पिटाई और ब्रेन हेमरेज से हुई। प्रशासन ने सोमवार को किसानों के साथ हुए समझौते के तहत मृत किसानों के परिजनों को 45-45 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात कही है। हिंसा में घायल हुए लोगों को 10 लाख रुपए मुआवजा मिलेगा।

यह भी पढ़ें
लखीमपुर खीरी कांड: किसानों के कुचले जाने के बाद ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर वाली टीशर्ट पहने हमलावर कौन हैं?
Lakhimpur हिंसा पर Politics: प्रियंका गांधी के tweet पर यूजर्स बोले- राजस्थान में किसान पिटे, आप कब जाएंगी?
 

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios