मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण मामले की सुनवाई के लिए तत्काल एक संविधान पीठ बनाने और मामले की सुनवाई पर लगी रोक को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। 

मुंबई. मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण मामले की सुनवाई के लिए तत्काल एक संविधान पीठ बनाने और मामले की सुनवाई पर लगी रोक को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। बता दें कि मंगलवार को इस मामले में सुनवाई 4 हफ्ते आगे बढ़ गई है।

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मंगलवार को पेश नहीं हो सके वकील

दरअसल, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को राज्य सरकार के वकील पेश नहीं हो सके। इसी वजह से अब सुप्रीम कोर्ट में मराठा आरक्षण पर चल रही सुनवाई चार हफ्ते के लिए टल गई है। कोर्ट में सुनवाई चार हफ्ते आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र में मराठा क्रांति दल सरकार के प्रति आक्रामक हो गया है। वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सरकार पर जमकर घेरा है।

क्या कहा था पीडब्लूडी मंत्री अशोक चव्हाण ने?

इस पर मराठा आरक्षण को लेकर गठित मंत्रिमंडल की उपसमिति के अध्यक्ष व पीडब्लूडी मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि तकनीकी कारणों से राज्य सरकार के वकील सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती थी कि मामले की सुनवाई एक संवैधानिक पीठ के माध्यम से की जाए। इसलिए राज्य सरकार ने मामले को संवैधानिक पीठ के लिए सात अक्तूबर को याचिका भी दी थी जिसे अदालत ने अपने पास रख लिया था। फिलहाल, मराठा आरक्षण पर स्टे लगा है। हम चाहते हैं कि इसपर सुप्रीम कोर्ट अंतरिम स्टे हटाए।