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'साहब' ने अपने लिए खरीदी अवैध तरीके से 29 गाड़ियां, HC की तल्ख टिप्पणी-देश में घोटालों से बड़ा है जांच घोटाला

राज्य की ओर से पेश हुए वकील के जवाब से असंतुष्ट High Court ने कहा कि दुर्भाग्य से इस देश में बड़ा घोटाला खुद घोटालों में नहीं है बल्कि घोटालों के बाद की पूछताछ में होती है। सच्चाई को दफनाने के लिए बहुत सारे कागज बर्बाद हो जाते हैं और शायद ही कभी दोषियों पर कार्रवाई की गई हो या जनता के बर्बाद हुए धन की वसूली के लिए कोई प्रयास किया गया हो।

Meghalaya High Court asks for report on Police department illegal Vehicle purchase, DVG
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First Published Oct 1, 2022, 7:04 PM IST

Meghalaya High Court: मेघालय में पुलिस अधिकारियों के अवैध वाहन खरीदी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य के हाईकोर्ट ने कुछ पुलिस अधिकारियों के वाहन खरीदी प्रकरण में गृह विभाग से रिपोर्ट तलब किया है। गृह विभाग को वाहनों की इस कथित अवैध खरीदी के केस में रिपोर्ट दाखिल करना होगा। हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या उन लोगों के खिलाफ कोई गिरफ्तारी हुई है जो प्रथम दृष्टया पुलिस वाहन रैकेट में शामिल मिले हैं।

मुख्य न्यायाधीश की बेंच कर रही है इस प्रकरण की सुनवाई

मेघालय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी की बेंच ने प्रकरण की सुनवाई की है। बेंच में जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह भी शामिल रहे। बेंच, हाल ही में पुलिस विभाग के अधिकारियों द्वारा वाहनों की कथित अवैध खरीद पर एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। बेंच ने आदेश दिया कि इस मामले में 17 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए।  

याचिका में क्या किया गया है दावा?

हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले ने दावा किया है कि 2019 में पुलिस विभाग ने सक्षम प्राधिकारी से बिना किसी अवैध मंजूरी के विभिन्न वाहन खरीदे थे। पुलिस विभाग ने 29 गाड़ियों की खरीदी की थी। यह सारी गाड़ियां पुलिस विभाग के तत्कालीन सहायक महानिरीक्षक (प्रशासन) जीके लंगराई  के व्यक्तिगत उपयोग में थी। इस तरह बिना किसी सक्षम अधिकारी के गाड़ियों की अवैध खरीदी से जनता के धन का दुरुपयोग हुआ।

कोर्ट ने राज्य सरकार की खिंचाई कर दी

उधर, राज्य की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच कराई गई है। मामला विचाराधीन है। कुछ व्यक्तियों के खिलाफ आरोप तय किए जा सकते हैं जिनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सामग्री मिली है। राज्य के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि तत्काल किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई करना जल्दबाजी होगी। इस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर कार्रवाई करने में आप जल्दबाजी नहीं दिखा रहे तो क्या यह सुनिश्चित किया है कि गबन में दोषी पाए गए लोगों से वसूली कैसे की जानी है। कहीं आरोप सिद्ध होने के पहले ही वह अपनी संपत्तियों को ट्रांसफर न कर दें। 

बड़ा घोटाला है इस देश में घोटालों की जांच

राज्य की ओर से पेश हुए वकील के जवाब से असंतुष्ट कोर्ट ने कहा कि दुर्भाग्य से इस देश में बड़ा घोटाला खुद घोटालों में नहीं है बल्कि घोटालों के बाद की पूछताछ में होती है। सच्चाई को दफनाने के लिए बहुत सारे कागज बर्बाद हो जाते हैं और शायद ही कभी दोषियों पर कार्रवाई की गई हो या जनता के बर्बाद हुए धन की वसूली के लिए कोई प्रयास किया गया हो। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आशा किया जा रहा है कि यह मामला भी अन्य मामलों की तरह लीपापोती की राह पर नहीं जाएगा।

क्या है पूरा प्रकरण?

मेघालय में इस साल पुलिस विभाग का बड़ा घोटाला सामने आया था। पुलिस महानिरीक्षण एमके सिंह के नेतृत्व में एक इन्वेस्टिगेटिंग टीम ने पाया था कि बिना किसी सक्षम अधिकारी के किसी आदेश के राज्य के एक सीनियर पुलिस अफसर ने 29 गाड़ियों की विभागीय खरीद स्वयं के उपयोग के लिए की थी। इन 29 गाड़ियों को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जीके लंगराई की व्यक्तिगत कस्टडी से बरामद किया गया था। गृह विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में कम से कम आठ मोटर साइकिल खरीदे गए थे लेकिन कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन वाहनों का इस्तेमाल उनके निजी उद्देश्य के लिए पुलिस मुख्यालय से बिना किसी मंजूरी के किया गया था। इन वाहनों के लिए कभी भी कोई लॉग बुक नहीं रखी गई थी। जबकि एआईजी ए द्वारा नियमित रूप से पीओएल / डीओएल कूपन जारी किए जाते रहे।

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