बारिश शुरू होते ही मच्छरों का आतंक शुरू हो गया है। हालांकि, हमें एक मच्छर के काटने से कोई गंभीर बीमारी का खतरा हमें नजर नहीं आता। हालांकि, मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के दर्ज मामले कुछ और कहानी बयां करते हैं।

नई दिल्ली. बारिश शुरू होते ही मच्छरों का आतंक शुरू हो गया है। हालांकि, हमें एक मच्छर के काटने से कोई गंभीर बीमारी का खतरा हमें नजर नहीं आता। हालांकि, मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के दर्ज मामले कुछ और कहानी बयां करते हैं। हम खतरनाक मच्छरों के काटने को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि मच्छरों से किस तरह की बीमारियां फैलती हैं।

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केवल मादा मच्छर ही काटती हैं और खून चूसती हैं। इससे उनके अंडों के लिए पोषक तत्व मिलते हैं। जब शरीर पर एक मच्छर बैठता है, तो यह अपने दो ट्यूबों के साथ त्वचा में छेद करता है। एक खून खींचता है। दूसरा रक्त के थक्के को रोकने में मदद करने के लिए एक एंजाइम को इंजेक्ट करता है। अधिकांश लोगों को इस एंजाइम से मामूली एलर्जी होती है, जो छोटे दाने और खुजली पैदा करता है।

मच्छरों अपने शिकार को इन्फ्रारेड रेडिएशन से पहचानते हैं और यह हमारे कामकाजों को देखते हुए अन्य संकेतों का इस्तेमाल कर शिकार बनाते हैं। 

कैसे फैलाते हैं बीमारी?
हालांकि मच्छरों की 3,000 से अधिक प्रजातियां हैं। इनमें से कुछ ही मनुष्यों के खून को चूसती हैं। मच्छर आम तौर पर वायरस या फंगी को उठाते हैं और वे हमारे शरीर पर बैठते हैं और काटते हैं। ऐसे में मच्छर एक वायरस के लिए एक वाहन का कार्य करता है।

वायरस मच्छर के अंदर भी प्रजनन कर सकता है। और जब यह दूसरे इंसान को काटता है, तो वायरस उस शरीर में फैल जाता है।

मच्छरों के बारे में एक स्पष्ट निवारक उपाय करने में मदद कर सकती है। यह दुनिया भर में सालाना होने वाली लाखों मौतों से बचने में भी मदद कर सकता है।