पीएमओ द्वारा गठित समितियां विभिन्न पहलुओं को देखेंगी। ये समितियां प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा के निर्देशन में काम करेंगी।

नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने रविवार को 10 अलग अलग उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया है। ये समितियां स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटाने और 21 दिन का लॉकडाउन समाप्त होने के बाद लोगों की परेशानियों को जितना संभव हो सके जल्द से जल्द दूर करने के बारे में सुझाव देंगी।

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PMO द्वारा गठित समितियां विभिन्न पहलुओं को देखेंगी

देश में कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के प्रयास स्वरूप 24- 25 मार्च की मध्यरात्रि से 21 दिन का लॉकडाउन (निकलने बढ़ने पर देश व्यापी पाबंदी) लागू किया गया है। इस दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य गतिविधियों पर रोक लगा दी गई हैं। लोगों को घरों में रहने को कहा गया है। पीएमओ द्वारा गठित समितियां विभिन्न पहलुओं को देखेंगी। ये समितियां प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा के निर्देशन में काम करेंगी। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

समिति संगठित और असंगठित क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों की चिंताओं को दूर करेगी

सरकार के इस कदम को देश में कोरोना वायरस के प्रसार को देखते हुये विभिन्न मोर्चो पर उभरी चुनौतियों से उत्पन्न आपात स्थिति से निपटने की दिशा में सक्रियता के साथ की जा रही पहलों के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि ये समूह स्वास्थ्य देखभाल सहित अपने अपने क्षेत्रों में कम से कम संभावित समय में सामान्य स्थिति बहाल करने की रणनीति पर भी काम करेंगी। आर्थिक मामलों के सचिव अतानु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में ‘‘अर्थव्यवस्था और कल्याण कार्य’’ समिति गठित की गई है। यह समिति संगठित और असंगठित क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों की चिंताओं को दूर करेगी। कोरोना वायरस फैलने और उसके बाद लॉकडाउन की वजह से इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है।

लॉकडाउन से गरीबों पर बुरा प्रभाव पड़ा है

सूत्रों ने कहा कि अर्थव्यवस्था में गतिविधियों को कम से कम समय में वापस पटरी पर लाने के बारे में भी समिति सुझाव दे सकती है। उन्होंने बताया कि गरीबों के लिये कल्याणकारी योजनाओं पर विशेष तौर से जोर दिया जायेगा। लॉकडाउन की वजह से इस तबके पर सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ा है। सूत्रों का कहना है कि समाज के गरीब और वंचित तबके पर सरकार का सबसे ज्यादा ध्यान है और आने वाले दिनों में उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों से निपटने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जायेगी।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)