गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि कोरोना काल में हुए नुकसान से अर्थव्यवस्था उबर गई है। पिछले साल भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। सक्षम नेतृत्व के बल पर हम शीघ्र ही मंदी से बाहर आ गए।

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी है। कोरोना काल में हुए नुकसान से अर्थव्यवस्था उबर गई है। पिछले साल भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।

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द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “आर्थिक मंच पर भारत की प्रगति उत्साहजनक रही है। पिछले साल भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। यह उपलब्धी आर्थिक अनिश्चितता से भरी वैश्विक पृष्ठभूमि में प्राप्त की गई है। वैश्विक महामारी (कोरोना) चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। दुनिया के अधिकांश हिस्से में आर्थिक विकास पर इसका असर पड़ रहा है। शुरुआती दौर में कोविड-19 से भारत की अर्थव्यवस्था को भी काफी क्षति पहुंची, फिर भी सक्षम नेतृत्व और प्रभावी संघर्षशीलता के बल पर हम शीघ्र ही मंदी से बाहर आ गए और अपनी विकास यात्रा को फिर से शुरू किया। अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्र अब महामारी के प्रभाव से बाहर आ गए हैं। भारत सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।”

कोरोना काल में किसी को खाली पेट नहीं सोना पड़ा
द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "यह बड़े ही संतोष का विषय है कि जो लोग हाशिए पर रह गए थे उनका भी योजनाओं और कार्यक्रमों में समावेश किया गया है तथा कठिनाई में उनकी मदद की गई है। मार्च 2020 में घोषित प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना पर अमल करते हुए सरकार ने उस समय गरीब परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जब देश के लोग कोरोना के कारण उत्पन्न आर्थिक व्यवधान का सामना कर रहे थे। इस सहायता की वजह से किसी को भी खाली पेट नहीं सोना पड़ा।"

भारत को सम्मान की नई दृष्टि से देखती है दुनिया
मुर्मू ने कहा, “अब विश्व समुदाय भारत को सम्मान की नई दृष्टि से देखता है। विश्व के विभिन्न मंचों पर हमारी सक्रियता से सकारात्मक बदलाव आने शुरू हो गए हैं। विश्व मंच पर भारत ने जो सम्मान अर्जित किया है उसके फल-स्वरूप देश को नए अवसर और जिम्मेदारियां भी मिली हैं। इस वर्ष भारत जी-20 समूह की अध्यक्षता कर रहा है। हम सभी की शांति और समृद्धि के पक्षधर हैं। G-20 की अध्यक्षता एक बेहतर विश्व के निर्माण में योगदान के लिए भारत को अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करती है। मुझे विश्वास है कि भारत के नेतृत्व में जी-20 अधिक न्यायपरक और स्थिरतापूर्ण विश्व-व्यवस्था के निर्माण के अपने प्रयासों को और आगे बढ़ाने में सफल होगा। जी-20 के सदस्य देशों का कुल मिलाकर विश्व की आबादी में लगभग दो तिहाई और ग्लोबल जीडीपी में 85 फीसदी हिस्सा है। इसलिए यह वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने और उनके समाधान के लिए एक आदर्श मंच है।”

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ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती का करना है सामना
राष्ट्रपति ने कहा, "मेरे विचार से ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन ऐसी चुनौतियां हैं जिनका सामना शीघ्रता से करना है। वैश्विक तापमान बढ़ रहा है और मौसम में बदलाव के चरम रूप दिखाई पड़ रहे हैं। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हमें प्राचीन परम्पराओं को नई दृष्टि से देखना होगा। हमें अपनी मूलभूत प्राथमिकताओं पर भी पुनर्विचार करना होगा। परंपरागत जीवन-मूल्यों के वैज्ञानिक आयामों को समझना होगा। अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे इस धरती पर सुखमय जीवन बिताएं तो हमें अपनी जीवन शैली को बदलने की जरूरत है।”

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