प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक (NITI Aayog Meeting) हुई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने बैठक का बहिष्कार किया है। वहीं, कोरोना संक्रमित होने के चलते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैठक में शामिल नहीं हुए।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की संचालन परिषद की सातवीं बैठक की अध्यक्षता में हुई। जुलाई 2019 के बाद गवर्निंग काउंसिल की यह पहली व्यक्तिगत बैठक थी। बैठक के एजेंडे में फसल विकास, फसल विविधीकरण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति समेत कई मुद्दे पर विधिवत चर्चा की गई। इस दौरान तिलहन और दालों के उत्पादन के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर भी चर्चा हुई। 

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नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल में सभी मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर और कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। पीएम कार्यालय ने पहले कहा था कि बैठक केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करेगी। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में शामिल हैं। बैठक का समापन शाम चार बजे होना है। नीति आयोग के वीसी और सीईओ की प्रेस वार्ता शाम करीब 5 बजे होगी।

केसीआर ने किया है बहिष्कार
तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर (K. Chandrashekar Rao) ने बैठक का बहिष्कार किया है। वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बैठक में शामिल नहीं हुए। वह कोरोना संक्रमित हो गए थे। केसीआर ने शनिवार को कहा, "केंद्र सरकार की मौजूदा प्रवृत्ति, राज्यों के साथ भेदभाव करने और उन्हें समान नहीं मानने के कड़े विरोध के निशान के रूप में मैं इससे (बैठक) दूर रह रहा हूं। केंद्र सरकार की यह प्रवृत्ति राष्ट्र को मजबूत और विकसित बनाने के हमारे सामूहिक प्रयास में भागीदार नहीं है।"

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6 महीने के विचार-विमर्श के बाद हुई बैठक
सरकारी बयान में केसीआर ने बैठक में शामिल नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण कहा गया है। इसमें जोर दिया गया है कि गवर्निंग काउंसिल एक ऐसा मंच है जहां केंद्र और राज्य स्तर पर देश में सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व प्रमुख विकास संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है। नीति आयोग का सम्मेलन छह महीने तक विचार-विमर्श के बाद हुआ। नीति आयोग ने बैठक से पहले कहा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्यों को सरकार का आवंटन लगभग दोगुना हो गया है। 2015-16 में यह 2,03,740 करोड़ रुपए था जो 2022-23 में बढ़कर 4,42,781 करोड़ रुपए हो गया है। 

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