आज देश गणतंत्र दिवस मना रहा है। पूरे देश में उत्सव का माहौल है। इसी दिन हमारे देश का संविधान लागू हुआ था। लेकिन क्या आप जानते हैं इसी दिन संविधान क्यों लागू हुआ था। ध्वजारोहण और झंडा फहराने में क्या अंतर होता है? यहां देखें…

नेशनल डेस्क। आज देश भर में उत्सव का माहौल है। सभी लोग गणतंत्र दिवस पूरे उल्लास के साथ मना रहे हैं। लेकिन गणतंत्र दिवस से जुड़ी कई सारी बातें हम अभी भी शायद नहीं जानते हैं। क्या कभी सोचा है कि 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं। झंडारोहण और झंडा फहराने में क्या अंतर होता है। आइए जानते हैं...

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26 जनवरी की ऐतिहासिक परेड देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग भी पहुंचते हैं। रायसेना हिल्स से परेड शुरू होती है। देश के वीर जवान परेड करते हुए राजपथ, इंडिया गेट होते हुए लालकिले तक मार्चपास्ट करते जाते हैं।

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इसलिए 26 जनवरी को मनाते हैं गणतंत्र दिवस
देश को 15 अगस्त के दिन आजादी के साथ ही स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिल गया था। तीन साल बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू करने के साथ भारत ने अपने आपको लोकतांत्रिक और गणतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया था। लेकिन 26 जनवरी की तारीख को चुने जाने के पीछे भी रोचक कहानी है। वह ये कि भारती राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में दिसंबर 1929 में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद 26 जनवरी 1930 पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया था। ऐसे में 26 जनवरी की तारीख को यादगार बनाने के लिए इसी तारीख को संविधान लागू किया गया। फिर गणतंत्र दिवस की घोषणा की गई।

ध्वजा रोहण और झंडा फहराने में अंतर
26 जनवरी और 15 अगस्त दोनों पर्वों पर झंडा फहराया जाता है। 15 अगस्त पर प्रधानमंत्री और 26 जनवरी को राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं। ध्वजारोहण और झंडा फहराना दोनों को आज भी काफी लोग एक ही मानते हैं लेकिन इसमें अंतर होता है। 15 अगस्त पर ध्वजारोहण किया जाता है। इसमें तिरंगे को ऊपर खींचा जाता है उसके बाद फहराया जाता है। जबकि 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज ऊपर बंधा रहता है। उसे केवल फहराया जाता है।