अहमदाबाद की रुशिना ने बीते तीन महिने में अपना 12 लीटर दूध दान किया है। जिससे आईसीयू में भूख से तड़प रहे नवजातों को बचाया जा सका। गौर करने वाली बात यह है कि रुशिना बीते सितंबर महिने में ही मां बनी है। जिसके बाद उन्होंने अपना दूध दान देकर पांच मासूमों को नया जीवन दिया है। 

अहमदाबाद. मां एक ऐसा शब्द है जिसके आगे सारे शब्द छोटे पड़ जाते है। जिसका अर्थ अनंत है। मां की ममता किसी से छिपी नहीं है। मां अपनी हो या पराई पर मां के भीतर जो ममत्व है उसे कोई झूठला नहीं सकता। यह दावा इसलिए भी सच साबित होता है क्योंकि गुजरात की एक मां ने मिसाल पैदा की है। उसने अपना दूध दान किया और इस दूध से 5 नवजात बच्चों की जान बचाई गई है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मां के ममता की दुनिया कीतनी बड़ी है। जिसका न कोई ओर है और न कोई छोर।

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क्या है पूरा मामला?

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक अहमदाबाद के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती में नवजातों को दूध की जरूरत थी। जिसके बाद रुशिना नामक यह महिला आगे आई और बच्चों को दूध पिलाने के लिए 12 लीटरर दूध दान किया। रुशिना पेशे से टीचर हैं। उन्होंने अपना दूध दान कर पांच नवजात बच्चों की जान बचाई। 

20 सितंबर को खुद बनी थी मां

अहमदाबाद की रुशिना 20 सितंबर 2019 के दिन मां बनी थी। तब उन्हें ख्याल आया था ना जाने कितनी ऐसी माएं होंगी जो अपने नवजात बच्चों को दूध नहीं पिला पाती होंगी। इसके बाद ही उन्होंने अपना दूध दान करने की ठानी थी। रुशिना के दूध से 5 बच्चों की जान बचाई गई है। जो आईसीयू में गंभीर हाल में भर्ती थे। 

मिल्क बैंक में दान किया दूध

रुशिना ने दूध दान करने की इच्छा अपने परिवारवालों से की। लिहाजा, घरवाले भी खुश हुए। फिर उनका संपर्क डॉक्टर आशीष मेहता से हुआ। उन्होंने हाल फिलहाल ही एक मिल्क बैंक का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें रुशिना ने हिस्सा लिया और दूध दान करना शुरू कर दिया।

अन्य महिलाएं भी आईं आगे 

आशीष कहते हैं कि कई माएं अपने बच्चों को दूध नहीं पिला पाती या तो वो बहुत कमजोर होती हैं या फिर मेडिकली रिस्क के कारण वो अपने बच्चे को दूध नहीं पिला पाती। ऐसे में रुशिना सामने आईं। उन्होंने अभी तक 5 नवजात बच्चों की जान बचाई है। आशीष ने बताया कि रुशिना को देखकर कई बाकी महिलाओं ने भी उनके मिल्क बैंक से जुड़ने की ठानी है।