जोधपुर में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सनातन संस्कृति भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा सिर्फ एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि आस्था को मजबूत करने, मूल्यों को सुदृढ़ करने और आध्यात्मिक चेतना को जगाने का एक पवित्र अवसर है।
जोधपुर (राजस्थान) [भारत], 7 जुलाई (एएनआई): लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि सनातन संस्कृति भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के बावजूद, भारत के सभ्यतागत मूल्य मानवता का मार्गदर्शन करते हैं और शांति, सद्भाव और नैतिक जीवन को बढ़ावा देने में प्रासंगिक बने हुए हैं।

बिरला ने यह टिप्पणी जोधपुर के श्री रघुवंशपुरम आश्रम स्थित श्री अर्धनारीश्वर मंदिर में 'प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव' और श्री राम कथा में सभा को संबोधित करते हुए की। बिरला ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव भारत की आध्यात्मिक परंपराओं, संत संस्कृति और लोक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का एक प्रेरक उत्सव है।
आस्था और मूल्यों को मजबूत करने का अवसर
उन्होंने कहा कि भगवान अर्धनारीश्वर की प्राण प्रतिष्ठा केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि एक पवित्र अवसर है जो आस्था को मजबूत करता है, मूल्यों को सुदृढ़ करता है और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को उसकी जड़ों से फिर से जोड़ते हैं और राष्ट्र निर्माण में सामूहिक भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।
मंदिरों की भूमिका
यह देखते हुए कि मंदिर आस्था के केंद्र हैं और सत्य, धर्म, मूल्यों, सेवा और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाली संस्थाएं भी हैं, उन्होंने कहा कि मंदिर भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और समाज के नैतिक ताने-बाने को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों ने ऐतिहासिक रूप से शिक्षण, दान और सामुदायिक कल्याण के केंद्रों के रूप में काम किया है, जिससे 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना का पोषण हुआ है।
शिव-शक्ति का सामंजस्यपूर्ण संतुलन
भगवान अर्धनारीश्वर के महत्व का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि यह दिव्य स्वरूप शिव और शक्ति, पुरुष और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण संतुलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के सार्वभौमिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और देवी पार्वती की करुणा के आदर्श समाज को संतुलित, सामंजस्यपूर्ण और दयालु जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह संतुलन हमें प्रकृति और मानवता दोनों का सम्मान करना सिखाता है और हमें सतत और समावेशी विकास की ओर मार्गदर्शन करता है।
भगवान श्री राम के आदर्श
भगवान श्री राम के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए बिरला ने कहा कि भगवान राम धर्म, कर्तव्य और लोक कल्याण के उच्चतम आदर्शों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि श्री राम कथा लोगों को इन आदर्शों को आत्मसात करने और समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के मार्ग पर चलकर नागरिक एक मजबूत, मूल्य-आधारित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
बिरला ने रेखांकित किया कि श्री रघुवंशपुरम आश्रम, केशव प्रिया गौशाला, मंदिर और श्री राम कथा भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण केंद्र हैं जो सेवा, नैतिक आचरण, गौ रक्षा और मानवता के मूल्यों को लगातार मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा का सच्चा संदेश केवल मंदिर में देवता को प्रतिष्ठित करना नहीं है, बल्कि अपने जीवन में सत्य, सेवा, करुणा और मूल्यों को स्थापित करना भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहल सामाजिक सद्भाव, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना को और मजबूत करेगी। (एएनआई)
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