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गारु घड़ा कलश यात्रा 12 अप्रैल से प्रारंभ

गारु घड़ा कलश यात्रा 12 अप्रैल से प्रारंभ होगी। बद्री-केदार मंदिर समिति ने गुरुवार को बाबा बद्रीनाथ के कपाट खोले जाने की पुष्टि की है। बताया कि श्री बद्रीनाथ बाबा का कपाट 27 अप्रैल को सुबह लगभग 7 बजे खोले जाएंगे। 

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शाही दरबार में तय हुई थी तारीख

बद्री-केदार समिति ने कहा कि नरेंद्र नगर के शाही दरबार में मनाई जाने वाली 'बसंत पंचमी' के शुभ अवसर पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की तारीख कैलेंडर का अध्ययन किया गया था। इसके बाद तय किया गया कि किस तारीख को बाबा बद्रीनाथ का कपाट खोला जाएगा। इस प्रक्रिया को पंचांग गढ़ना कहा जाता है। मंदिर समित ने यह जानकारी देते हुए कहा कि शुभ मुहुर्त तय होने के बाद सबको जानकारी दे दी गई है।

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पूरी परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए खुलेगा गेट

समिति ने बताया कि उचित रीति-रिवाजों और परंपराओं का निर्वहन करते हुए कपाट खोलने की प्रक्रिया होगी। गेट रीति-रिवाजों के अनुसार ही खुलेंगे। यहां बसंत पंचमी उत्सव के लिए शाही टिहरी परिवार के लोग, बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य, डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के प्रतिनिध और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचे थे।
 

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गढ़वाल के पहाड़ों में स्थित है भगवान विष्णु का यह मंदिर

गढ़वाल के पहाड़ियों में स्थित चमोली जिला में बद्रीनाथ मंदिर है। चमोली के अलकनंदा नदी के किनारे स्थित भगवान बद्रीनाथ मंदिर, विष्णु भगवान को समर्पित मंदिर है। बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखंड के बद्रीनाथ शहर में है।

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केवल छह महीना के लिए होती है यात्रा

यह हर साल छह महीने (अप्रैल के अंत और नवंबर की शुरुआत के बीच) के लिए खुला रहता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चार धाम यात्रा अगले चार महीनों में शुरू होगी।

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चार प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है जिन्हें 'चार धाम' कहा जाता

बद्रीनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल में बंद कर दिए जाते हैं। यह मंदिर उन चार प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है जिन्हें 'चार धाम' कहा जाता है। चारधाम बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री और केदारनाथ को कहा जाता है।