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6 पार्टी ने नहीं माना आदेश, 1 लाख का जुर्माना लगाकर SC ने कहा- 48 घंटे में बताओ क्रिमिनल कैंडीडेट्स का रिकॉर्ड

कांग्रेस, भाजपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जद (यू), राजद और लोजपा जैसे अन्य दलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

Supreme Court imposed fine of Rs 1 lakh on 6 political parties and orderd to reveal records of criminal candidates
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New Delhi, First Published Aug 10, 2021, 6:05 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आपराधिक रिकॉर्ड वाले कैंडिडेट्स के बारे में जानकारी पब्लिश नहीं करने पर भाजपा और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों पर जुर्माना लगाया। कोर्ट ने आदेश दिया था कि पार्टी अपने आपराधिक रिकॉर्ड वाले कैंडिडेट्स की जानकारी सार्वजानिक करें।

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कांग्रेस, भाजपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जद (यू), राजद और लोजपा जैसे अन्य दलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पार्टियों को कैंडिडेट्स के चयन के 48 घंटों के भीतर विवरण अपनी वेबसाइटों पर प्रकाशित करना आवश्यक है, न कि नामांकन दाखिल करने की पहली तारीख से दो सप्ताह पहले। कोर्ट ने कहा कि उसके पास बार-बार सांसदों से आवश्यक संशोधन लाने के लिए कदम उठाने की अपील की गई है ताकि राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की भागीदारी प्रतिबंधित हो सके।

राजनीतिक दल गहरी नींद से जागने से इनकार करते हैं। हालांकि, शक्तियों के पृथक्करण की संवैधानिक योजना को देखते हुए, हालांकि हम चाहते हैं कि इस मामले में तत्काल कुछ करने की आवश्यकता है, हमारे हाथ बंधे हुए हैं और हम राज्य की विधायी शाखा के लिए आरक्षित क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं कर सकते हैं। भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में अपराधीकरण का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है।

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कोर्ट ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि कानून निर्माता "जल्द ही जागेंगे" और राजनीति में अपराधीकरण की कुप्रथा को दूर करने के लिए "बड़ी सर्जरी" करेंगे। इससे पहले कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें हाईकोर्ट के आदेश के बिना मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले को वापस नहीं ले सकती हैं।  इस मामले में वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें दोषी विधायकों और सांसदों को आजीवन चुनाव लड़ने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमना की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन-न्यायाधीशों की पीठ, राज्य सरकार द्वारा राज्य उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के बिना मौजूदा (पूर्व) सांसदों और विधायकों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला वापस नहीं लिया जा सकता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विनीत सरन ने कहा।  
 

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