धर्म कोई हो एक समान होनी चाहिए महिलाओं की शादी की उम्र, याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

| Dec 09 2022, 09:31 PM IST

धर्म कोई हो एक समान होनी चाहिए महिलाओं की शादी की उम्र, याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
धर्म कोई हो एक समान होनी चाहिए महिलाओं की शादी की उम्र, याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
Share this Article
  • FB
  • TW
  • Linkdin
  • Email

सार

राष्ट्रीय महिला आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर गुहार लगाई है कि सभी धर्मों में महिलाएं की शादी की न्यूनतम उम्र एक होनी चाहिए। याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ में महिलाओं की शादी की उम्र बढ़ाने की मांग की गई है।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर मांग की है कि देश में महिलाओं की शादी की न्यूनतम उम्र एक होनी चाहिए। चाहे वे किसी धर्म से हों या उनके पर्सनल लॉ कोई भी हो। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। 

CJI डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। याचिका में भारतीय कानूनों के अनुसार मुस्लिम पर्सनल लॉ में महिलाओं की शादी की कम से कम उम्र बढ़ाने की मांग की है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने मांग की है कि सभी समुदायों और धर्मों की सभी लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 18 साल होनी चाहिए।

Subscribe to get breaking news alerts

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को छोड़कर अन्य पर्सनल लॉ के अनुसार पुरुष के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिला के लिए 18 साल है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार 15 साल की उम्र की लड़की विवाह के योग्य हो जाती है। 

बालिग होने से पहले नहीं होनी चाहिए शादी
राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि बालिग होने से पहले लड़कियों की शादी नहीं होनी चाहिए। नाबालिग मुस्लिम लड़कियों की शादी रोकने के लिए दंडात्मक कानून लागू किए जाने चाहिए। 18 साल के कम उम्र के बच्चों को विशेषकर लड़कियों को यौन उत्पीड़न जैसे अपराधों से बचाने के लिए भारत में पॉक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) है।

यह भी पढ़ें- Cyclone Mandous: चेन्नई एयरपोर्ट से सभी उड़ानें रद्द, हो रही भारी बारिश, ऑरेंज अलर्ट जारी

आईपीसी के अनुसार 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ सेक्स "बलात्कार" की कैटेगरी का अपराध है। नाबालिग लड़की की सहमति किसी भी यौन गतिविधि के लिए कानून की नजर में वैध सहमति नहीं है। बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत 21 वर्ष से कम उम्र के पुरुष और 18 वर्ष से कम उम्र की महिला का विवाह दंडनीय अपराध है।

यह भी पढ़ें- आने वाले दिनों में तीनों सेनाओं में होगी बंपर भर्ती, खाली हैं 1.35 लाख पद