महाराष्ट्र के बीड में चौथी कक्षा के स्टूडेंट ने स्कूल में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में अपनी परेशानी लिख दी। निबंध को पढ़कर भावुक हुई टीचर ने छात्र का निबंध दोस्तों को भेज दिया। मंगेश ने लिखा, साल भर पहले मेरे पिता की टीबी से मौत हो गई। मैं और मां खूब रोये थे। तब बहुत से लोग हमारे घर आये थे, पर अब कोई हमारी मदद नही करता।

मुंबई. जिस वक्त बच्चों के खेलने कूदने का उम्र हो उस वक्त बच्चे पर परिवार की जिम्मेदारियां आ जाए तो कोई क्या कर सकता है। खासकर तब जब बच्चा अभी सही और गलत समझने लायक ही न हुआ हो। दरअसल, महाराष्ट्र के बीड जिले में एक कक्षा चौथी के छात्र का दर्द सामने आया है। जिसमें छात्र के पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई है। यही नहीं उसकी मां भी दिव्यांग है। जिसके कारण घर का सारा काम भी उसे ही करना पड़ता हैय़ 

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निबंध प्रतियोगिता में छलका दर्द 

महाराष्ट्र के बीड में चौथी कक्षा के स्टूडेंट ने स्कूल में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में अपनी परेशानी लिख दी। निबंध को पढ़कर भावुक हुई टीचर ने छात्र का निबंध दोस्तों को भेज दिया। जिसके बाद निबंध बड़े ही तेजी से वायरल हुआ और सीधे सामाजिक न्याय मंत्री के पास पहुंच गया। जिसके बाद मंत्री ने छात्र के परिवार को आर्थिक मदद देने आदेश भी दिया है। दरअसल, बीड जिले के जिला परिषद स्कूल में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसमें शिक्षक ने मेरे पिता विषय पर निबंध लिखने के लिए कहा। 

क्या लिखा मंगेश ने? 

चौथी कक्षा के छात्र मंगेश वाल्के ने निबंध में अपने घर की पूरी व्यथा लिख दी। मंगेश ने लिखा, ''मेरे पिता कहते थे पढ़ लिखकर साहब बनना, लेकिन साल भर पहले मेरे पिता की टीबी से मौत हो गई। मैं और मां खूब रोये थे। तब बहुत से लोग हमारे घर आये थे, पर अब कोई हमारी मदद नही करता। मां अपंग है, इसलिए घर का सारा काम अब मुझे ही करना पड़ता है। 

शिक्षिका ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ 

स्कूल की शिक्षिका का कहना है उन्होंने जब मंगेश का लिखा निबंध पढ़ा तो उनका दिल भर आया और मदद के लिए अपने परिचितों को भेज दिया। मंगेश का लिखा निबंध इस कदर वायरल हुआ कि सीधे राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री के पास पहुंच गया और फिर मंत्रीजी ने मदद का सरकारी आदेश भी जारी कर दिया। वो अब मंगेश का खर्चा तब तक उठाएंगे, जब तक वो नौकरी नहीं करने लगता।

गाय के भरोसे चलता था परिवार, सरकार ने दी सहायता 

मंगेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। मां शारदा के मुताबिक मंगेश के लिए उसके पिता ने एक गाय भी खरीदा थी ताकि वो दूध पी सके। अब मंगेश को ही इस गाय की देखभाल करनी पड़ती है। जिस उम्र में बच्चों के खेलने खाने का वक्त होता है, उस उम्र में मंगेश पर अपने घर की जिम्मेदारी का भार आ गया है, बहरहाल बीड के मंगेश को तो अब सरकार का सहारा मिल गया है।