कांग्रेस नेता अजय माकन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 5000 करोड़ रुपए का बिजली घोटाला करने का आरोप लगाया है। उन्होंने उप राज्यपाल से मिलकर इसकी जांच कराने की मांग की है।

नई दिल्ली। कांग्रेस ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 5 हजार करोड़ रुपए का बिजली घोटाला करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि घोटाले का पैसा केजरीवाल और उनकी पार्टी को मिला है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के शासनकाल के दौरान राज्य के ऊर्जा मंत्री रहे कांग्रेस नेता अजय माकन और दो अन्य पूर्व मंत्रियों ने सोमवार को उप राज्यपाल विनय सक्सेना से मुलाकात की।

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तीनों ने उप राज्यपाल को अरविंद केजरीवाल सरकार पर लगाए अपने आरोपों के बारे में जानकारी दी और उनसे घोटाले की जांच कराने का आग्रह किया। उपराज्यपाल से मिलने के बाद अजय माकन ने कहा कि आज उप राज्यपाल के पास दिल्ली के हम तीनों पूर्व ऊर्जा मंत्री गए। शिला दीक्षित के समय हम तीनों 15 वर्ष लगातार पावर मिनिस्टर थे। हमलोगों ने दिल्ली में बिजली सब्सिडी में हुए 5000 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच की मांग की है। 

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कहां गए सब्सिडी लेने वाले 30 फीसदी लोग
अजय माकन ने कहा, "अरविंद केजरीवाल की सरकार और मनीष सिसोदिया ने मार्च 2021 में विधानसभा में कहा था कि दिल्ली के 90 फीसदी लोगों को बिजली सब्सिडी मिलती है। इन्होंने 14371 करोड़ रुपए प्राइवेट कंपनियों को सब्सिडी के तौर पर दिया। अब जब वोलेंट्री सब्सिडी स्कीम आई तो इसमें सिर्फ 60 फीसदी लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया, तो 30 फीसदी लोग कहां चले गए?"

कांग्रेस नेता ने कहा, "हमलोग लगातार मांग कर रहे हैं कि बिजली सब्सिडी का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक अकाउंट में डाला जाना चाहिए। इसके लिए मैंने अगस्त 2019 में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया था। हमने मांग की थी कि पैसा सीधे लोगों के खाते में जमा होनी चाहिए। प्राइवेट कंपनियों को नहीं देना चाहिए, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।"

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केजरीवाल ने किया लोगों से धोखा
माकन ने कहा, "फरवरी 2018 में डीईआरसी ने लिखकर दिल्ली सरकार को कहा कि आप डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर करिए। सीधे लोगों के खाते में पैसे डालिए। केजरीवाल ने 2015 के अपने मेनिफेस्टो में कहा था कि प्राइवेट कंपनियों को सीधे सब्सिडी नहीं देंगे। पैसा लोगों को या ट्रांसमिशन कंपनी को देंगे। उन्होंने खुद अपना वादा पूरा नहीं किया। इसकी वजह क्या है? ये 5 हजार करोड़ रुपए जो लोगों की जेब में जाना चाहिए वो किसी और के जेब में जा रहा है। केजरीवाल इसके हिस्सेदार हैं। केजरीवाल की पार्टी इसकी हिस्सेदार है। इसकी जांच होनी चाहिए। पैसे सीधे खाते में नहीं भेजकर केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों के साथ धोखा किया है। अगर खाते में पैसे जाते तो लोगों को 200 यूनिट बिजली फ्री नहीं मिलती। उन्हें 300-400 यूनिट बिजली फ्री मिलती।" 

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