सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभा सम्मान समारोह में बताया कि उत्तराखंड के 27 उत्पादों को GI टैग मिला है। इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने संत रविदास की 650वीं जयंती पर उनके समानता और सद्भाव के आदर्शों को भी याद किया।

उत्तराखंड के 27 उत्पादों को मिला GI टैग

रुड़की (उत्तराखंड) [भारत], 27 जुलाई (एएनआई): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को हरिद्वार जिले के रुड़की में स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित 'प्रतिभा सम्मान समारोह' में हिस्सा लिया।

सीएम धामी ने एक्स पर एक पोस्ट में इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा, "इस संबंध में, राज्य के 27 उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला है। इन उत्पादों की अनूठी पहचान स्थापित होने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादकों, किसानों, कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को नए बाजार, बेहतर कीमतें और रोजगार के अधिक अवसर मिल रहे हैं।"

सीएम धामी ने संत रविदास को दी श्रद्धांजलि

इससे पहले 25 जुलाई को, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में त्यागी रोड पर एक स्थानीय होटल में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के 650वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित समरसता संकल्प अभियान की राज्य स्तरीय कार्यशाला में भाग लिया था।

श्रद्धेय संत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु रविदास की शिक्षाएं और आदर्श समाज के लिए कालातीत और अत्यधिक प्रासंगिक बने हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास का जीवन भारत की उस समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है जिसने समाज को समानता, मानवता, सामाजिक न्याय और सद्भाव की दिशा में मार्गदर्शन किया है। उन्होंने अपनी शिक्षाओं और अनुकरणीय जीवन के माध्यम से लोगों को छुआछूत, भेदभाव और जाति-आधारित असमानता जैसी सामाजिक बुराइयों से ऊपर उठने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गुरु रविदास का मानना ​​था कि किसी व्यक्ति की पहचान जाति से नहीं बल्कि उसके चरित्र, कर्म और मूल्यों से परिभाषित होनी चाहिए।

धामी ने कहा कि गुरु रविदास ने कर्मकांडों और दिखावे से मुक्त, सरल भक्ति की वकालत की, जिसमें शुद्ध हृदय जीवन का आधार हो।

उनके प्रसिद्ध संदेश, "मन चंगा तो कठौती में गंगा" का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संत की शिक्षाएं आंतरिक पवित्रता और सामाजिक सद्भाव को प्रेरित करती रहती हैं।

उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने एक ऐसे समतामूलक समाज की कल्पना की थी जहां हर व्यक्ति के साथ सम्मान का व्यवहार हो, भेदभाव का कोई स्थान न हो और कोई भूखा न रहे। उनकी बेगमपुरा की अवधारणा, जो दुख और असमानता से मुक्त समाज है, एक मार्गदर्शक आदर्श के रूप में काम करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश गुरु रविदास के सामाजिक सद्भाव और अंत्योदय के आदर्शों को साकार कर रहा है। (एएनआई)

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