चुनाव आयोग (ECI) ने वोटर आईडी (EPIC) और आधार (Aadhaar) लिंकिंग पर उच्च स्तरीय बैठक की। जानिए किन संवैधानिक प्रावधानों का होगा पालन और चुनावी प्रक्रिया में क्या नए बदलाव आ सकते हैं। EPIC Aadhaar Linking

Voter id-Aadhar linking: चुनाव आयोग (ECI) ने मंगलवार को वोटर आईडी (EPIC) और आधार (Aadhaar) लिंकिंग को लेकर एक हाईलेवल मीटिंग की है। चुनाव आयोग का दावा है कि अगर वोटर आईडी और आधार लिंकिंग हो जाएगी तो फर्जी वोटर्स पर लगाम लगाया जा सकेगा। हालांकि, इस लिंकिंग को लेकर अभी सरकार की ओर से कोई बयान नहीं आया है।

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संविधान के अनुच्छेद 326 और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन

चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया कि EPIC-Aadhaar लिंकिंग की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) के तहत लागू प्रावधानों के अनुरूप होगी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आधार (Aadhaar) केवल पहचान का प्रमाण (Proof of Identity) है, नागरिकता (Citizenship) का नहीं। इस संबंध में UIDAI और चुनाव आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों के बीच जल्द ही विस्तृत चर्चा होगी। 

चुनाव आयोग ने बयान में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जा सकता है। आधार कार्ड केवल व्यक्ति की पहचान को प्रमाणित करता है, नागरिकता को नहीं। इसलिए, EPIC-Aadhaar लिंकिंग केवल अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4), 23(5) और 23(6) के प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी।

चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए ऑल पार्टी मीटिंग

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पदभार संभालने के बाद से कई लंबित चुनावी चुनौतियों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है जिनमें से कुछ दशकों से लंबित थीं। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 31 मार्च 2025 तक सभी राजनीतिक दलों (All Party Meeting) के साथ जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs), मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के स्तर पर बैठकें की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य राजनीतिक दलों को सीधे चुनावी प्रक्रिया में शामिल करना और उनकी समस्याओं व सुझावों को सुनना है।

ECI ने पहली बार राजनीतिक दलों से मांगे सुझाव, 30 अप्रैल तक भेज सकेंगे सुझाव

इतिहास में पहली बार, चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय (National) और राज्य-मान्यता प्राप्त (State-Recognized) राजनीतिक दलों से चुनावी प्रक्रिया में सुधार को लेकर 30 अप्रैल, 2025 तक कानूनी दायरे में सुझाव देने का आग्रह किया है।