हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी करने वाले चारों आरोपियों के एनकाउंटर की चर्चा पूरे देश में हो रही है। जहां कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसके विरोध में हैं।

नई दिल्ली. हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी करने वाले चारों आरोपियों के एनकाउंटर की चर्चा पूरे देश में हो रही है। जहां कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसके विरोध में हैं। आरोपियों के एनकाउंटर की खबर को वर्ल्ड मीडिया ने भी प्रमुखता से छापा है।

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भारत की पुलिस पर लगातार कस्टडी में हत्याओं का आरोप लगता रहा है- द डॉन
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द डॉन ने लिखा, भारत की पुलिस पर लगातार न्यायेतर हत्या का आरोप लगता रहा है। खासकर मुंबई में और पंजाब, कश्मीर विद्रोह के दौरान। इस तरह की हत्याओं में शामिल पुलिस अफसरों को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का तमगा दिया जाता है और इनपर कई फिल्में भी बनती हैं। 

रॉयटर्स: पुलिस के बताए समय से संशय पैदा किया
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा, शुरुआत में एक पुलिस अफसर ने बताया था कि आरोपियों का एनकाउंटर शुक्रवार तड़के 3.30 बजे हुआ। लेकिन अब पुलिस का कहना है कि सुबह 5:45 से 6:15 बजे के बीच घटना के रीक्रिएशन के वक्त आरोपियों ने पुलिस से हथियार छुड़ा कर भागने लगे। उन्होंने पुलिस पर फायरिंग भी की। जवाबी कार्रवाई में चारों आरोपी मारे गए। समय में इस संशय पर पुलिस की ओर से कोई जानकारी नहीं दी जा सकी।

द गार्जियन: ब्रिटिश अखबार ने उठाए सवाल
द गार्जियन ने लिखा, भारत की पुलिस ने जघन्य गैंगरेप मामले में 4 आरोपियों को ऐसे में हालात में गोली मारी, जिसे संदेहास्पद कहा जा रहा है। अस्पष्टता के वजह ही यह न्यायेतर हत्या जैसा मामला लग रहा है। यह भारत में सामान्य ही है। इस एनकाउंटर की वजह से भारत में दो विचार आमने-सामने आ गए। कुछ लोगों ने एनकाउंटर को तुरंत न्याय कहा तो कुछ कह रहे हैं कि पुलिस ने कानून को अपने हाथ में लिया। 

अल-जजीरा: भारत की पुलिस पर लगता रहा है न्यायेतर हत्या का आरोप
कतर की न्यूज वेबसाइट अल-जजीरा के मुताबिक, भारत की पुलिस पर न्यायेतर हत्या का आरोप लगता रहा है। इन्हें एनकाउंटर कहा जाता है। खासकर विशेष रूप से सशस्त्र विद्रोह का अनुभव करने वाले राज्यों जैसे कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में।