131st Constitutional Amendment Bill Fails: लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल दो-तिहाई बहुमत न मिलने से गिर गया। इसमें सीटें 543 से 850 करने का प्रस्ताव था। महिला आरक्षण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी सियासत छिड़ गई है।
लोकसभा में पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका और इसके बाद देश की राजनीति में बड़ा टकराव शुरू हो गया है। यह सिर्फ एक बिल का गिरना नहीं है, बल्कि महिला आरक्षण, परिसीमन और चुनावी ढांचे को लेकर गहरी राजनीतिक लड़ाई की तस्वीर सामने आई है। सरकार इस बिल को महिला सशक्तिकरण से जोड़कर देख रही थी, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक ढांचे में बदलाव की कोशिश बता रहा है।
क्या था इस बिल में खास
इस संशोधन विधेयक में संसद की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया था। साथ ही इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़ने की बात भी शामिल थी। यही बिंदु सबसे ज्यादा विवाद का कारण बना। विपक्ष का कहना था कि यह सीधे तौर पर महिला आरक्षण का बिल नहीं, बल्कि चुनावी गणित बदलने की कोशिश है।
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क्यों गिर गया बिल
विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था, लेकिन सरकार यह आंकड़ा नहीं जुटा पाई। नतीजा यह हुआ कि बिल 54 वोटों से गिर गया। इस हार के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
अमित शाह का विपक्ष पर हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिल गिरने के बाद विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह “नारी शक्ति का अपमान” है और इसका असर आने वाले चुनावों में दिखेगा। उन्होंने साफ कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने के रास्ते में विपक्ष खड़ा हुआ है और देश की महिलाएं इसे देख रही हैं।
राहुल गांधी ने बताया ‘संविधान पर हमला’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बिल को “संविधान पर हमला” बताया। उन्होंने कहा कि यह महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि परिसीमन और जनगणना के जरिए चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश थी। उनके मुताबिक विपक्ष ने मिलकर इस कोशिश को रोका है।
प्रियंका गांधी और विपक्ष का तर्क
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि अगर सरकार बिना शर्तों के सीधा महिला आरक्षण बिल लाती, तो इसे आसानी से पास किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़कर जटिल बना दिया, जिससे इसका पास होना मुश्किल हो गया। कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने भी कहा कि “महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन वाला बिल गिरा है।”
अखिलेश यादव का बयान
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पूरी तरह समर्थन में है। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसके साथ ऐसे प्रावधान जोड़ना चाहती थी, जो महिलाओं के अधिकारों को सीमित कर सकते थे। विपक्ष ने इसी के खिलाफ अपनी “लक्ष्मण रेखा” खींची।
क्या महिला आरक्षण खत्म हो गया?
समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन ने साफ किया कि 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभी भी लागू है और यह संशोधन उसी से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ है तो मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
सत्ता पक्ष का पलटवार
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता और नारी शक्ति सब देख रही है और आने वाले समय में विपक्ष को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष हर अच्छे काम का विरोध करता है और महिलाओं के प्रतिनिधित्व के खिलाफ खड़ा है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी का “चाल, चरित्र और चेहरा” सामने आ गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इस बिल को नए रूप में फिर से पेश करेगी या महिला आरक्षण को अलग तरीके से लागू करने की कोशिश करेगी। फिलहाल इतना साफ है कि महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर राजनीति और ज्यादा तेज होने वाली है, और इसका असर आने वाले चुनावों में भी दिख सकता है।
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