RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान कि प्रदर्शन देशद्रोह नहीं है, पर CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने तंज कसा। उन्होंने 'To whom it may concern' लिखकर प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र-विरोधी कहने वालों पर निशाना साधा।
नई दिल्लीः CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक संक्षिप्त लेकिन तीखी टिप्पणी की है, जिसे सीधे तौर पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। भागवत ने कहा था कि आज की पीढ़ी (Gen Z) का प्रदर्शन करना उन्हें देशद्रोही नहीं बना देता। इसी बयान के बाद दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'To whom it may concern' (यह उन लोगों के लिए है, जिनसे इसका संबंध है), और इस एक लाइन ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। दिपके की यह टिप्पणी उन बीजेपी नेताओं के एक धड़े पर निशाने की तरह देखी जा रही है, जो अक्सर प्रदर्शनकारियों पर 'राष्ट्र-विरोधी' होने का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि दिपके ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके लिखने का अंदाज़ और समय, दोनों ही साफ़ इशारा कर रहे हैं। ज़ाहिर है, जब RSS जैसे संगठन के प्रमुख ऐसी बात कहें तो उसके कई मायने निकाले जाते हैं।
क्या था मोहन भागवत का बयान?
मोहन भागवत ने अपने बयान में आज की युवा पीढ़ी, यानी जेन Z के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखने के लिए प्रदर्शन करना किसी को 'एंटी-नेशनल' या राष्ट्र-विरोधी नहीं बनाता। यह बयान इसलिए अहम हो जाता है क्योंकि हाल के कई आंदोलनों और प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को ऐसी संज्ञाएं दी गई हैं। भागवत का यह नज़रिया उस धारणा से बिल्कुल अलग है, जो उनके अपने वैचारिक परिवार से जुड़े कई नेता अपनाते हैं। यही वजह है कि उनके बयान पर तुरंत प्रतिक्रियाएं आने लगीं। इसने एक तरह से उन लोगों को असहज कर दिया जो हर विरोध को देश के खिलाफ़ गतिविधि के तौर पर देखते हैं।
अभिजीत दिपके का इशारा किसकी तरफ?
अभिजीत दिपके, जो CJP के संस्थापक हैं, ने भागवत के बयान के तुरंत बाद यह मौका लपक लिया। उनका 'To whom it may concern' वाला पोस्ट सीधे तौर पर उन नेताओं और लोगों पर एक तंज है जो प्रदर्शनकारियों को लेकर कठोर राय रखते हैं। यह एक तरह से कह रहा है कि RSS प्रमुख की यह नसीहत उन लोगों को सुननी चाहिए। यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे एक ही वैचारिक खेमे के भीतर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। एक तरफ संघ प्रमुख का नरम रुख है, तो दूसरी तरफ कुछ नेताओं का आक्रामक रवैया। दिपके ने इसी विरोधाभास पर उंगली रख दी है, वो भी बिना किसी का नाम लिए।
