कैम्ब्रिज स्टडी के मुताबिक बोको हराम से जुड़े लड़ाकों ने ChatGPT समेत कई AI टूल्स का इस्तेमाल किया। ISIL समर्थकों की AI सुरक्षा पर भी चिंता सामने आई।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब सिर्फ लिखने, रिसर्च करने और सवालों के जवाब पाने तक सीमित नहीं रह गया है। एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि हथियारबंद और आतंकवादी गुट भी AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक, बोको हराम के कुछ आतंकी तकनीकी सलाह, हमलों की तैयारी और ऑपरेशन के दौरान आने वाली समस्याओं को समझने के लिए बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रहे थे।

किन AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे आतंकी?

  • अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह रिसर्च बोको हराम से जुड़े दो गुटों- इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) और जमात अहल अस-सुन्नाह लिद-दावाह वल-जिहाद (JAS) के 27 पूर्व सदस्यों के इंटरव्यू पर आधारित है।
  • पूर्व सदस्यों ने बताया कि उन्होंने हमलों से पहले, उनके दौरान और बाद में तकनीकी और सैन्य सलाह के लिए OpenAI के ChatGPT, Anthropic के Claude, Google के Gemini, xAI के Grok, Meta AI और चीन के DeepSeek जैसे AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।
  • अल जजीरा को मिली जानकारी के मुताबिक, ISIL (ISIS) समर्थक ऑनलाइन तकनीकी मंचों पर AI की सुरक्षा पाबंदियों को दरकिनार करने और हथियारों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के तरीकों पर भी चर्चा कर रहे थे।

UN और एक्सपर्ट्स ने भी AI के दुरुपयोग पर जताई चिंता

ये निष्कर्ष ऐसे समय सामने आए हैं जब चरमपंथी संगठनों द्वारा नई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। फरवरी में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने सुरक्षा परिषद को ISIL और उससे जुड़े गुटों द्वारा एडवांस्ड AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी थी। वहीं, रिसर्चर्स और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है कि AI की क्षमताएं सुरक्षा उपायों की तुलना में तेजी से विकसित हो सकती हैं। कैम्ब्रिज रिसर्च में शामिल एक पूर्व ISWAP कमांडर ने AI की क्षमता को लेकर कहा कि उन्हें ऐसा कोई सवाल नहीं मिला जिसका जवाब उन्हें नहीं मिला हो।

ISWAP के सदस्यों को AI इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग देने का दावा

  • कैम्ब्रिज की रिसर्च में ISWAP के वरिष्ठ सदस्यों को AI टूल्स से परिचित कराने की एक व्यवस्थित कोशिश का भी जिक्र है।
  • पूर्व लड़ाकों के मुताबिक, कुछ ऑपरेटिव्स ISWAP के कब्जे वाले इलाकों में गए और वरिष्ठ सदस्यों को AI सिस्टम इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी।
  • उन्हें लैपटॉप और प्रोजेक्टर के जरिए AI चैटबॉट्स के साथ बातचीत करने का तरीका दिखाया गया।
  • रिसर्च के अनुसार, कुछ सदस्यों को प्राइवेसी और एन्क्रिप्शन सुविधाओं वाले लैपटॉप दिए गए।
  • उन्हें अलग-अलग AI प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने और पेड सब्सक्रिप्शन लेने में भी मदद की गई।
  • यह दावा किया गया है कि AI का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत स्तर पर कभी-कभार सवाल पूछने तक सीमित नहीं था।

चरमपंथी गुटों में AI से जुड़ी अलग यूनिट होने का दावा

  • रिपोर्ट के मुताबिक, ISWAP और JAS दोनों में विशेष AI यूनिट बनाए जाने की बात सामने आई। इनमें इंजीनियर, हथियार विशेषज्ञ और तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग शामिल बताए गए हैं।
  • JAS के एक पूर्व कमांडर ने 23 सदस्यों वाली एक ऐसी यूनिट का जिक्र किया, जो सोलर पावर से चलने वाले कमरे से काम करती थी। उनके अनुसार, इस यूनिट में सदस्य जानकारी का विश्लेषण करते थे, सवालों के जवाब तलाशते थे और वरिष्ठ कमांडरों को ट्रेनिंग देते थे।
  • पूर्व सदस्यों के बयानों से यह संकेत मिलता है कि इन संगठनों के लिए AI एक सामान्य चैट टूल से आगे बढ़कर एक ऑन-डिमांड तकनीकी सलाहकार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था।

AI को तकनीकी सलाहकार की तरह इस्तेमाल करने की बात

  • कैम्ब्रिज स्टडी की लेखिका एंटोनिया जूलिच ने अल जजीरा को बताया कि इंटरव्यू किए गए 27 लोगों में से करीब 10 लोगों ने विस्फोटकों से संबंधित गतिविधियों में AI के इस्तेमाल की बात कही।
  • जूलिच के मुताबिक, चिंता केवल इस बात की नहीं थी कि AI हथियारों से जुड़ी जानकारी दे सकता है। ऐसी बहुत सी जानकारी पहले से ही मैनुअल और इंटरनेट पर मौजूद हो सकती है।
  • उनके अनुसार, ज्यादा महत्वपूर्ण चिंता AI की ऐसी क्षमता है, जिसमें वह किसी खास परिस्थिति से जुड़ी समस्या पर जवाब दे सकता है और जरूरत के मुताबिक आगे की जानकारी भी दे सकता है।
  • पूर्व लड़ाकों ने बताया कि सीमित संसाधनों या मुश्किल परिस्थितियों में वे AI चैटबॉट्स से सलाह लेते थे। ऑपरेशन के दौरान समस्या आने या किसी कार्रवाई के बाद भी वे AI सिस्टम की मदद लेते थे।
  • रिसर्चर्स को यह भी बताया गया कि AI का इस्तेमाल सैन्य उपकरणों और ड्रोन से जुड़े सवालों के लिए किया गया।

युद्ध के मैदान से जुड़ी रणनीति में AI के इस्तेमाल का दावा

  • रिपोर्ट में दावा किया गया है कि AI का इस्तेमाल केवल हथियारों से जुड़े सवालों तक सीमित नहीं था।
  • कुछ मामलों में लड़ाकों ने जमीन पर मौजूद स्थिति की जानकारी हासिल करने और उसका विश्लेषण करने के लिए AI सिस्टम का सहारा लिया।
  • पूर्व सदस्यों के अनुसार, किसी अनजान हथियार या उपकरण के सामने आने पर भी AI से जानकारी लेने की कोशिश की जाती थी।
  • इसी तरह, किसी ऑपरेशन के असफल होने के बाद कमांडर कथित तौर पर AI चैटबॉट्स को घटना की जानकारी देकर नाकामी के संभावित कारणों को समझने की कोशिश करते थे।
  • इससे यह सवाल उठता है कि AI केवल जानकारी देने वाला टूल नहीं रह गया है, बल्कि कुछ चरमपंथी समूह इसे अपने फैसलों और रणनीति से जुड़ी सलाह के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।