NISAR Mission: न्यूयॉर्क में NASA के अमित क्षत्रिय ने कहा कि ISRO के साथ एजेंसी की साझेदारी ‘असाधारण’ है और आगे और सहयोग होगा. उन्होंने NISAR (जुलाई 2025) और मानव अंतरिक्ष उड़ान का जिक्र किया, Artemis Accords (70+ देश) पर बात की. पेगी व्हिटसन ने Ax-4 पायलट शुभांशु शुक्ला की सराहना की.

NASA ISRO Partnership: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है। NASA के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर और चीफ इंजीनियर अमित क्षत्रिय ने ISRO के साथ मौजूदा साझेदारी को ‘असाधारण’ बताया है। उन्होंने कहा कि विज्ञान अभियानों से लेकर मानव अंतरिक्ष उड़ान तक दोनों एजेंसियों के बीच सहयोग के कई अवसर हैं और आने वाले समय में यह साझेदारी और व्यापक हो सकती है।

NISAR से मानव अंतरिक्ष उड़ान तक बढ़ रहा सहयोग

भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष साझेदारी का प्रमुख उदाहरण NISAR मिशन है। NASA-ISRO का यह संयुक्त उपग्रह पृथ्वी की सतह में होने वाले बदलावों का अध्ययन करता है। अगस्त 2026 में हुई भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक में दोनों पक्षों ने NISAR की सफलता के बाद भविष्य के विज्ञान अभियानों और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

अमित क्षत्रिय के मुताबिक, ISRO जिस तरह विज्ञान मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी क्षमताएं विकसित कर रहा है, वह महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि NASA और ISRO पहले से कई क्षेत्रों में अनुभव और तकनीकी सीख साझा कर रहे हैं।

Artemis Accords में भी साथ हैं भारत और अमेरिका

अंतरिक्ष सहयोग का एक और महत्वपूर्ण आधार Artemis Accords है। NASA के अनुसार, यह सुरक्षित, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए साझा सिद्धांतों का ढांचा है। सितंबर 2026 तक 72 देश इस समझौते से जुड़ चुके हैं।

अमित क्षत्रिय ने अंतरिक्ष क्षेत्र में नेतृत्व के साथ साझा मूल्यों और मानकों के महत्व पर जोर दिया। उनका कहना था कि अंतरिक्ष अन्वेषण केवल तकनीकी क्षमता का विषय नहीं है, बल्कि इसमें पारदर्शिता, सहयोग और जिम्मेदार व्यवहार भी अहम हैं।

शुभांशु शुक्ला के Ax-4 मिशन ने बढ़ाई साझेदारी

भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग का एक अहम उदाहरण Axiom Mission 4 भी रहा। जून 2025 में लॉन्च हुए इस मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने पायलट की भूमिका निभाई थी। मिशन की कमांडर पूर्व NASA अंतरिक्ष यात्री Peggy Whitson थीं। उनके साथ पोलैंड के Sławosz Uznański-Wiśniewski और हंगरी के Tibor Kapu मिशन विशेषज्ञ के तौर पर शामिल थे।

Ax-4 दल ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर करीब 18 दिन बिताए और माइक्रोग्रैविटी में कई वैज्ञानिक प्रयोग किए। इस मिशन ने भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भी अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सहयोग का महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराया।

मंगलयान ने भी दुनिया का ध्यान खींचा

अमेरिकी अंतरिक्ष क्षेत्र से भारत की उपलब्धियों की चर्चा में मंगलयान का भी उल्लेख किया गया। भारत का Mars Orbiter Mission नवंबर 2013 में लॉन्च हुआ था और ISRO ने सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। इसके साथ भारत मंगल की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की चौथी अंतरिक्ष एजेंसी बना था।

भारत अब चंद्रमा, पृथ्वी-अध्ययन और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को आगे बढ़ा रहा है। अगस्त 2026 की भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप बैठक में दोनों देशों ने NISAR के बाद भविष्य के विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी।