मिडिल ईस्ट में तनाव, हवाई रास्तों पर पाबंदी और महंगे ईंधन के कारण एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय उड़ानें घटा रही है। जुलाई तक घाटे वाले रूट्स पर उड़ानें रद्द रहेंगी, जिससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

मुंबई: मिडिल ईस्ट में तनाव, हवाई रास्तों पर पाबंदी और हवाई जहाज के ईंधन (जेट फ्यूल) की बढ़ती कीमतों के कारण एयर इंडिया अपनी इंटरनेशनल उड़ानें घटा रही है। एयर इंडिया के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने बताया है कि आने वाले जुलाई महीने तक उड़ानों पर यह पाबंदी जारी रहेगी। कंपनी उन रूट्स पर अपनी फ्लाइट्स कैंसिल कर रही है, जो मुनाफे में नहीं हैं।

कर्मचारियों को भेजे एक संदेश में विल्सन ने साफ किया कि मौजूदा हालात में ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बड़े घाटे में चल रही हैं। मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात की वजह से विमानों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत बढ़ गई है और कंपनी का खर्चा भी आसमान छू रहा है। अप्रैल और मई में पहले ही कुछ उड़ानें कम कर दी गई थीं। लेकिन हालात में सुधार न होने के कारण एयर इंडिया को जून और जुलाई के शेड्यूल में भी बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

विल्सन ने यात्रियों के ट्रैवल प्लान और कर्मचारियों के ड्यूटी शेड्यूल में हो रहे बदलावों पर खेद जताया। उन्होंने यह भी कहा कि जब होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलेगा और मिडिल ईस्ट में तनाव खत्म होगा, तभी उड़ानें पहले की तरह सामान्य हो पाएंगी। एक अनुमान के मुताबिक, 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में एयर इंडिया ग्रुप को करीब 22,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इस भारी आर्थिक संकट के बीच, हवाई रास्तों में रुकावटें एयर इंडिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं।