नीट पेपर लीक मुद्दे पर संसद के भीतर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच रणनीति को लेकर मतभेद सामने आए। लोकसभा में अखिलेश यादव के बयान, केसी वेणुगोपाल से बातचीत और विपक्ष की अलग-अलग रणनीति ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी।
नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष सरकार पर हमलावर है। हालांकि, बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता एक साथ प्रदर्शन करते नजर आए, लेकिन सदन के भीतर चर्चा के दौरान दोनों दलों के बीच रणनीति को लेकर अलग-अलग रुख सामने आया। लोकसभा में हुई बहस और उसके बाद नेताओं के बीच हुई बातचीत ने इस मुद्दे को राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है।
लोकसभा में बोलने को लेकर बना असहज माहौल
बुधवार दोपहर लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। इसी दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव अपनी बात रखना चाहते थे।
लेकिन पीठासीन अधिकारी ने पहले कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल को बोलने का अवसर दिया। उनके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने अपनी बात रखी। इससे नाराज होकर अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ सदन से बाहर जाने लगे। इस पर स्पीकर ने उन्हें रोकते हुए कहा कि वे भी अपनी बात रखें। जवाब में अखिलेश यादव ने तंज करते हुए कहा, "क्या बोलें?"
इसके बाद उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता पर कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि "इस्तीफा तो जब चाहें तब लिया जा सकता है, लेकिन असली चर्चा छात्रों के मुद्दों पर होनी चाहिए।"
यह भी पढ़ें: शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पीएम मोदी से माफी... NEET पर राहुल गांधी ने क्या-क्या मांगा?
कार्यवाही के बाद भी जारी रही कांग्रेस-सपा नेताओं की बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, सदन स्थगित होने के बाद के.सी. वेणुगोपाल और अखिलेश यादव के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई। बताया जा रहा है कि वेणुगोपाल ने पूछा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से क्यों नहीं उठाया गया, क्योंकि यह छात्रों की भी प्रमुख मांग है। वहीं, अखिलेश यादव ने कांग्रेस नेतृत्व से यह भी सवाल किया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन में अन्य विपक्षी दलों को पहले से भरोसे में क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
सड़क पर साथ, लेकिन रणनीति में दिखा अंतर
दिलचस्प बात यह रही कि लोकसभा की कार्यवाही से पहले राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने संसद परिसर के बाहर एक साथ प्रदर्शन किया था। विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।
हालांकि, सदन के भीतर दोनों दलों की प्राथमिकताओं और संसदीय रणनीति में अंतर साफ दिखाई दिया। अखिलेश यादव ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराने के साथ चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों की अनदेखी जारी रही, तो समाजवादी पार्टी फिर से सड़कों पर आंदोलन करेगी। नीट पेपर लीक को लेकर विपक्ष का सरकार पर हमला जारी है, लेकिन संसद के भीतर रणनीति को लेकर उभरे मतभेदों ने इस राजनीतिक विवाद को नई दिशा दे दी है।
यह भी पढ़ें: CJP Protest: 'ये पब्लिसिटी के लिए है?' ये कैसे कह सकते हैं...HC ने केंद्र-दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस
