Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और उनके परिवार को अंतिम श्रद्धांजलि दी जा रही है। तेहरान में भावुक माहौल के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य और IAEA को लेकर भी बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं।

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों को अंतिम विदाई देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में देश के शीर्ष नेता, सैन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। समारोह के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत कई वरिष्ठ नेता भावुक नजर आए। खामेनेई के साथ उनकी पत्नी, बेटी, दामाद और 14 महीने की पोती को भी श्रद्धांजलि दी जा रही है, जिसके छोटे ताबूत के पास उसकी तस्वीर भी रखी गई है।

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तेहरान में श्रद्धांजलि, 9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार

तेहरान के मोसल्ला परिसर में अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों के ताबूत रखे गए हैं। श्रद्धांजलि समारोह में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और कई सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समारोह के दौरान कई नेता भावुक होकर रो पड़े। बताया गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों की मौत हुई थी। इसके 131 दिन बाद, 9 जुलाई को उन्हें ईरान के मशहद शहर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

अंतिम संस्कार के बीच बढ़ी कूटनीतिक हलचल

खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कतर की ओर से संकेत दिया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगला दौर की बातचीत अंतिम संस्कार के बाद आयोजित हो सकती है। इस बीच ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कर इजराइल पर अपने शीर्ष नेतृत्व को धमकी देने का आरोप लगाया है। वहीं अंतिम संस्कार को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि कार्यक्रम में 30 देशों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं।

होर्मुज से परमाणु कार्यक्रम तक, ईरान के बड़े संदेश

पिछले 24 घंटों में ईरान ने कई अहम बयान दिए हैं। तेहरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी जहाज तय समुद्री मार्ग का पालन करें। साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों में प्रवेश की अनुमति नहीं देने का फैसला भी दोहराया है। इन घटनाक्रमों के बीच पूरी दुनिया की नजर ईरान की आंतरिक स्थिति और क्षेत्रीय कूटनीति पर बनी हुई है।