Amas Darbhanga Expressway: बिहार में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) का निर्माण तेजी से हो रहा है। करीब 198 किमी लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे गया, पटना, वैशाली और समस्तीपुर होते हुए दरभंगा को जोड़ेगा। इसके शुरू होने से गया-दरभंगा सफर 3-4 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है।
Gaya Darbhanga Expressway: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (NH-119D) परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 170-198 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की लिंक सड़कों को मिलाकर कनेक्टिविटी लगभग 230 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। चार लेन में तैयार हो रहा यह एक्सप्रेसवे भविष्य में छह लेन तक विस्तार योग्य होगा।
दक्षिण से उत्तर बिहार को जोड़ेगा एक्सप्रेसवे
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत औरंगाबाद और गया जिले की सीमा के पास आमस से होगी। यहां यह दिल्ली-कोलकाता NH-19 से जुड़ेगा। इसका उत्तरी छोर दरभंगा के बेला नवादा के पास होगा, जहां से यह NH-27 ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से कनेक्ट होगा।
इस एक्सप्रेसवे का मुख्य रूट औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर होते हुए दरभंगा तक जाएगा। इसके अलावा लिंक रोड के जरिए बोधगया और राजगीर को भी इससे जोड़ने की योजना है। करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना बिहार के लिए अहम ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे मानी जा रही है।
गया से दरभंगा का सफर होगा आसान
फिलहाल आमस से दरभंगा तक सड़क मार्ग से पहुंचने में करीब 6 से 7 घंटे लग सकते हैं। एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह समय घटकर करीब 3 से 4 घंटे रह सकता है। इससे दक्षिण और उत्तर बिहार के बीच लोगों और माल की आवाजाही आसान होगी।
इसका फायदा बोधगया, राजगीर, पटना और वैशाली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को भी मिलेगा। बौद्ध और जैन सर्किट से जुड़े इन इलाकों में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को तेज और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
मखाना और लीची जैसे उत्पादों को मिलेगा बाजार
एक्सप्रेसवे केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि बिहार के व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उत्तर बिहार के मखाना, लीची और अन्य कृषि उत्पादों को दक्षिण बिहार के बाजारों के साथ-साथ दिल्ली-कोलकाता कॉरिडोर और आगे बंदरगाहों तक पहुंचाने में समय कम हो सकता है।
इसके अलावा यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बिहार आने वाले लोगों के लिए भी आवागमन आसान होगा।
दिल्ली और कोलकाता की यात्रा में भी कमी आएगी समय
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे के दूसरे एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद लंबी दूरी की यात्रा का समय भी कम होने की उम्मीद है। दरभंगा से दिल्ली का सफर करीब 18-22 घंटे से घटकर 10-12 घंटे तक आ सकता है। वहीं दरभंगा से कोलकाता की यात्रा 14-16 घंटे के बजाय करीब 7-8 घंटे में पूरी होने की संभावना है।
इसी तरह गया से कोलकाता की यात्रा का समय 10-12 घंटे से घटकर करीब 5-6 घंटे रह सकता है। वाराणसी से गया और दरभंगा के बीच भी यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।
गंगा पर बनेगा 6 लेन का महासेतु
पटना के पास यह एक्सप्रेसवे गंगा नदी को पार करने के लिए कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से जुड़ेगा। करीब 9.75 किलोमीटर लंबे छह लेन के इस पुल से पटना और उत्तर बिहार के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके अलावा पटना आउटर रिंग रोड से जुड़ाव होने पर शहर के भीतर प्रवेश किए बिना वाहनों को आगे निकलने का विकल्प मिलेगा।
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे को वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना भी महत्वपूर्ण है। NH-319B के जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से होकर गुजरेगा। प्रस्तावित बदलावों और लिंक रूट के जरिए गया तथा राजगीर जैसे प्रमुख शहरों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे बिहार के सड़क नेटवर्क में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे यात्रा का समय घटने के साथ पर्यटन, कृषि उत्पादों की सप्लाई, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
