वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर में अब तक का सबसे पुराना और गहरा 'व्हेल कब्रिस्तान' खोजा है। यह करीब 50 लाख साल पुराना है और समुद्र में 7 किलोमीटर से भी ज़्यादा गहराई में मिला है। यहां सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में व्हेल के जीवाश्म और कंकाल फैले हुए हैं।

पीसा: वैज्ञानिकों के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी है। उन्होंने हिंद महासागर में 50 लाख साल पुराने व्हेल के जीवाश्मों से भरा एक 'कब्रिस्तान' खोज निकाला है। यह अब तक खोजा गया सबसे पुराना व्हेल कब्रिस्तान है। आमतौर पर मरी हुई व्हेल के अवशेष समुद्र में 4 किलोमीटर से कम गहराई में मिलते हैं। लेकिन यह नया 'समुद्री कब्रिस्तान' 7 किलोमीटर से भी ज़्यादा गहरा है। रिसर्चर्स का कहना है कि यह समुद्र तल पर सैकड़ों मील तक फैला हुआ है।

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रिसर्चर्स ने पाया है कि इन गहरी समुद्री जगहों पर अभी भी व्हेल के सड़ते हुए शरीर मौजूद हैं और इन पर निर्भर होकर एक बड़ी समुद्री दुनिया फल-फूल रही है। इटली की पीसा यूनिवर्सिटी के रिसर्चर डॉ. जियोवानी बियानुची बताते हैं, "यह खोज साबित करती है कि जीवन बिना रोशनी और भारी दबाव के भी ज़िंदा रह सकता है और विकसित हो सकता है। यहां ऐसे कई जीव हो सकते हैं, जिनकी पहचान विज्ञान अभी तक नहीं कर पाया है।"

इस बड़ी खोज के पीछे चीन, इटली और न्यूज़ीलैंड के वैज्ञानिकों की एक टीम है। उन्होंने यह रिसर्च हिंद महासागर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में 'डायमांटीना फ्रैक्चर ज़ोन' नाम के इलाके में की। यह इलाका गहरी पहाड़ियों और खाइयों से भरा है। यह इलाका करीब 5 से 6 करोड़ साल पहले बना था, जब ऑस्ट्रेलियाई और अंटार्कटिक महाद्वीप एक-दूसरे से अलग हुए थे।

मशहूर साइंस मैगज़ीन 'नेचर' में छपी स्टडी के मुताबिक, इस इलाके में व्हेल के जीवाश्म समुद्र तल से 7002 मीटर की गहराई तक पाए गए। वैज्ञानिकों ने समुद्र के नीचे 32 बार डाइविंग की, जिसमें उन्हें 485 जीवाश्म वाली जगहें और 5 नई सड़ती हुई व्हेल की बॉडी मिलीं। ये सभी अवशेष उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की एक खास दिशा में करीब 1200 किलोमीटर तक फैले हैं। इसलिए, रिसर्चर्स का मानना है कि यह व्हेल के आने-जाने के रास्ते से जुड़ा एक बड़ा 'सुपर कॉरिडोर' हो सकता है।

यहां मिला सबसे बड़ा अवशेष अंटार्कटिक मिंक व्हेल का 5 मीटर लंबा कंकाल है। इसके अलावा, विलुप्त हो चुकी कुछ दुर्लभ व्हेल प्रजातियों की खोपड़ियां भी जीवाश्म के रूप में मिली हैं। इनमें 53 लाख (5.3 मिलियन) साल पुरानी एक व्हेल प्रजाति भी शामिल है, जिसे वैज्ञानिकों ने 'टेरोसेटस डायमांटीने' नाम दिया है। इन सड़ते हुए व्हेल के शरीरों पर केकड़े, सीपियां, हड्डियों को खाने वाले खास कीड़े और स्टारफिश जैसे कई जीव रहते हैं। इनमें से ज़्यादातर ऐसी नई प्रजातियां हो सकती हैं, जिनके बारे में विज्ञान को अब तक पता नहीं है।

ब्रिटेन की साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी में समुद्री खोज के प्रोफेसर जॉन कोपले इस खोज को समुद्र विज्ञान में एक 'अद्भुत' खोज मानते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी गहराई में इस तरह की कॉलोनी पहली बार मिली है। एक वर्ग किलोमीटर में करीब 800 कंकालों का मिलना वैज्ञानिकों को हैरान कर रहा है। यह भी दिलचस्प है कि कम गहरे पानी में रहने वाली मिंक व्हेल और शिकार के लिए समुद्र की गहराइयों में जाने वाली बीक्ड व्हेल के अवशेष एक ही जगह पर मिले हैं।