Azam Khan news: रामपुर की विशेष अदालत ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की अपील खारिज कर दी है। दो पैन कार्ड मामले में 7-7 साल की सजा बरकरार रहेगी। अब सजा बढ़ाने की मांग पर भी सुनवाई बाकी है।

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को रामपुर की विशेष अदालत से राहत नहीं मिली है। दो पैन कार्ड मामले में दाखिल उनकी अपील को खारिज कर दिया गया है, जिससे निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा अब भी कायम रहेगी।

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सेशन कोर्ट ने नहीं मानी दलीलें, सजा पर मुहर

रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए (सेशन) कोर्ट में दोनों ने अपनी सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। उनका दावा था कि वे निर्दोष हैं और निचली अदालत का फैसला गलत है। लेकिन विशेष न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार की अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही है और उसमें किसी तरह की त्रुटि नहीं है।

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दो पैन कार्ड केस क्या है, क्यों हुई सजा

यह मामला अब्दुल्ला आजम खान के नाम पर दो अलग-अलग पैन कार्ड होने से जुड़ा है। आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया। इसी मामले में ट्रायल कोर्ट ने पिता और बेटे दोनों को दोषी मानते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई थी। अब सेशन कोर्ट के फैसले के बाद यह सजा बरकरार रहेगी।

जेल में बंद हैं पिता-पुत्र, 2025 से चल रही सजा

इस केस में दोषी ठहराए जाने के बाद मोहम्मद आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान 17 नवंबर 2025 से रामपुर जिला जेल में बंद हैं। उनकी कानूनी लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है, जहां राहत की उम्मीद फिलहाल खत्म होती नजर आ रही है।

अब बढ़ सकती है सजा? नई चुनौती सामने

परिवार के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। राज्य सरकार और नवाब काजिम अली खान (नावेद मियां) ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर सजा बढ़ाने की मांग की है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सजा और बढ़ाने को लेकर भी सुनवाई हो सकती है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

सरकारी पक्ष ने क्या कहा

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा सिंह राणा ने बताया कि अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही माना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों की अपीलें खारिज कर दी गई हैं और अब केवल सजा बढ़ाने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई बाकी है।

आगे क्या, कानूनी विकल्प बचे हैं या नहीं?

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, सेशन कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब हाईकोर्ट का रास्ता खुला रहता है। हालांकि, सजा बरकरार रहने से राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर इसका असर दिख सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि आजम खान और उनके बेटे आगे किस अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं।

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