Ballia Police Sexual Harassment Case: बलिया में इंसाफ के बदले महिला से कथित तौर पर शारीरिक संबंध की मांग का मामला सामने आया। वायरल ऑडियो के बाद दो पुलिसकर्मी सस्पेंड। जानिए पूरा केस, आरोप और जांच की अब तक की स्थिति।

UP Crime News: उत्तर प्रदेश के बलिया से सामने आई यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस भरोसे पर चोट है जो आम लोग पुलिस पर करते हैं। एक महिला, जो अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत लेकर थाने पहुंची थी, उसे न्याय के बजाय कथित तौर पर अपमानजनक शर्तों का सामना करना पड़ा। मामला सामने आते ही पुलिस महकमे में हलचल मच गई।

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शिकायत लेकर पहुंची थी इंसाफ की उम्मीद में

पीड़ित महिला ने वन विभाग के एक दरोगा पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला का कहना है कि आरोपी ने उससे मंदिर में शादी की, लेकिन करीब 8 महीने बाद उसे अपनाने से इनकार कर दिया। इसी शिकायत को लेकर वह थाने पहुंची थी, ताकि उसे न्याय मिल सके और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हो।

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“चार्जशीट चाहिए तो मिलना होगा…” यहीं से शुरू हुआ विवाद

महिला का आरोप है कि उभांव थाने में तैनात इंस्पेक्टर क्राइम नरेश कुमार मलिक ने चार्जशीट दाखिल करने के नाम पर उसे निजी तौर पर मिलने के लिए कहा। आरोप और गंभीर तब हो गया, जब महिला ने दावा किया कि उससे शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया। यानी जांच के नाम पर एक तरह की ‘डील’ की कोशिश की गई।

वायरल ऑडियो ने खोली पूरी पोल

इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा, जब महिला और इंस्पेक्टर के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो में कथित तौर पर ऐसी बातें सुनाई दीं, जिसने हर किसी को चौंका दिया। इसके बाद मामला तेजी से ऊपर तक पहुंच गया और कार्रवाई की मांग तेज हो गई।

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SP का सख्त एक्शन: एक नहीं, दो अधिकारी निलंबित

मामले की गंभीरता को देखते हुए बलिया के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने पहले इंस्पेक्टर क्राइम नरेश कुमार मलिक को सस्पेंड किया। जांच के दौरान उभांव थाने के थानाध्यक्ष संजय शुक्ला का नाम भी सामने आया। इसके बाद उन्हें भी निलंबित कर दिया गया। फिलहाल पूरे मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक को सौंप दी गई है।

जब स्थानीय स्तर पर नहीं मिली सुनवाई, तो ऊपर पहुंची बात

पीड़िता का आरोप है कि जब स्थानीय स्तर पर उसकी बात नहीं सुनी गई, तो उसने आजमगढ़ रेंज के डीआईजी और एसपी से संपर्क किया। उसने लिखित शिकायत में साफ कहा कि उससे पैसों के साथ-साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी दबाव डाला जा रहा था।

सवालों के घेरे में सिस्टम: आखिर भरोसा करें तो किस पर?

यह घटना एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े करती है, क्या थानों में महिलाओं के लिए माहौल सुरक्षित है? क्या जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है? और क्या ऐसे मामलों में समय पर सख्त कार्रवाई हो पाती है? दो पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद फिलहाल कार्रवाई होती दिख रही है, लेकिन असली सवाल अभी भी बाकी है, क्या पीड़िता को न्याय मिलेगा? बलिया की यह घटना बताती है कि सिस्टम में जवाबदेही जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है पीड़ितों का भरोसा बनाए रखना। अब नजर जांच पर है, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी।

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