Bareilly Saptanath Eco City: बरेली में बड़ा बाइपास और पीलीभीत बाइपास के बीच 267 हेक्टेयर में सप्तनाथ ईको सिटी बनेगी। 13.17 अरब के प्रोजेक्ट में 9 गांवों की जमीन शामिल होगी।

बरेली के विस्तार की तस्वीर अब शहर की मौजूदा सीमाओं से आगे जाती दिख रही है। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) ने बड़ा बाइपास और पीलीभीत बाइपास के बीच एक नई टाउनशिप बसाने की तैयारी तेज कर दी है। करीब 267 हेक्टेयर में प्रस्तावित ‘सप्तनाथ ईको सिटी’ के लिए 13.17 अरब रुपये का बजट रखा गया है। DPR और ले-आउट प्लान तैयार होने के बाद अब जमीन और जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

9 गांवों की जमीन पर बसाई जाएगी नई टाउनशिप

सप्तनाथ ईको सिटी के लिए आसपुर खूबचंद, अडुपुरा जागीर, नवदिया कुर्मियान, अहिलादपुर, कुम्हरा, बरकापुर, हरहरपुर, कलापुर और मोहरनिया की जमीन प्रस्तावित है। कुल 267.1443 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी।

इसमें 11.65 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन है, जबकि 255.4943 हेक्टेयर जमीन किसानों से खरीदी जानी है। BDA ने भूमि खरीद की प्रक्रिया शुरू करने के साथ कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने और RERA से अनुमति लेने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

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सिर्फ घर नहीं, सुविधाओं पर भी फोकस

BDA की योजना में केवल आवासीय विकास नहीं, बल्कि जरूरी शहरी सुविधाओं के लिए भी जमीन का प्रावधान किया जा रहा है। परियोजना की DPR और ले-आउट प्लान कंसल्टेंट ड्रीम्स ने तैयार किया है।

इसी बीच रामगंगानगर के सेक्टर-8 स्थित शिप्रा एन्क्लेव के ले-आउट में भी बदलाव प्रस्तावित है। यहां 9,297 वर्गमीटर में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला बनाने की योजना है। इसके लिए शासन से 47.97 करोड़ रुपये की वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के लिए भी जमीन बढ़ाई गई है।

एयरफोर्स की NOC से लेकर पर्यावरण मंजूरी तक

सप्तनाथ ईको सिटी को जमीन पर उतारने से पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन और विभिन्न विभागों से NOC लेना जरूरी होगा। BDA इसके लिए संबंधित विभागों से समन्वय कर रहा है।

प्रस्तावित क्षेत्र में 45 मीटर तक ऊंचे निर्माण को लेकर एयरफोर्स अधिकारियों की ओर से आपत्ति नहीं जताई गई है। हालांकि, NOC के लिए जमीन के कोऑर्डिनेट और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। यानी परियोजना की घोषणा के बाद अब असली फोकस जमीन अधिग्रहण, मंजूरियों और तय प्रक्रिया को पूरा करने पर है।

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