बेंगलुरु में स्वास्थ्य खतरों के कारण कबूतरों को दाना खिलाने पर नए नियम लागू। अब सार्वजनिक स्थानों पर दाना खिलाना प्रतिबंधित है। यह केवल सुबह 7-9 बजे तक, पंजीकृत NGO द्वारा निर्धारित जगहों पर ही किया जा सकता है।

बेंगलुरु: लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने बेंगलुरु में कबूतरों को दाना खिलाने को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। शहर में कबूतरों की बढ़ती आबादी और उनकी बीट-पंखों से होने वाले स्वास्थ्य खतरों को लेकर चिंता बढ़ रही थी। इसी वजह से अधिकारियों ने उन सार्वजनिक जगहों पर कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगा दी है, जहां इससे लोगों की सेहत को खतरा हो सकता है या उन्हें असुविधा हो सकती है। इन नए नियमों का मकसद कबूतरों की बीट और पंखों से फैलने वाली सांस की बीमारियों को कम करना है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना है कि दाना खिलाने का काम साफ-सफाई के साथ और नियंत्रित तरीके से हो। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी और स्थानीय निकायों को पूरे शहर में इन गाइडलाइंस को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है।

कबूतरों की बीट और पंखों से सेहत को खतरा

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कबूतरों की बीट और पंखों से हवा में फैलने वाले बारीक कण सांस की गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं। इनमें निमोनिया, एलर्जी और फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बीमारियां शामिल हैं। बच्चों, बुजुर्गों और जिन लोगों को पहले से सांस की कोई बीमारी है, उन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा माना जाता है। विभाग का कहना है कि बिना रोक-टोक दाना खिलाने से कबूतरों की आबादी बढ़ी है, जिससे सेहत से जुड़े ये खतरे भी बढ़ गए हैं। इसी वजह से सख्त नियम बनाने की जरूरत पड़ी।

बेंगलुरु में कबूतरों को दाना खिलाने के नए नियम

स्वास्थ्य विभाग ने पूरे शहर में कबूतरों को दाना खिलाने के लिए ये गाइडलाइंस जारी की हैं:

सिर्फ तय जगहों पर ही दाना खिलाने की इजाजत

सड़कों, फुटपाथ, पार्कों और ऐसी किसी भी निजी जगह पर कबूतरों को दाना खिलाना मना है, जहां लोगों को परेशानी हो या सेहत का खतरा हो। दाना खिलाने की इजाजत सिर्फ उन्हीं जगहों पर होगी, जिन्हें स्थानीय अधिकारी तय करेंगे।

दाना खिलाने का समय तय

तय की गई जगहों पर भी सिर्फ सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच ही कबूतरों को दाना खिलाया जा सकेगा।

जिम्मेदारी रजिस्टर्ड NGO को सौंपी गई

कबूतरों को दाना खिलाने का काम सिर्फ रजिस्टर्ड गैर-सरकारी संगठन (NGO) या चैरिटेबल संस्थाएं ही कर सकेंगी। इन जगहों की साफ-सफाई बनाए रखने और लोगों की शिकायतों को दूर करने की जिम्मेदारी भी इन्हीं संस्थाओं की होगी।

अपार्टमेंट और घर मालिकों के लिए सलाह

अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों और रेजिडेंट्स एसोसिएशन को सलाह दी गई है कि वे छतों, बालकनी या घरों के आसपास ज्यादा मात्रा में दाना न डालें, क्योंकि इससे कबूतरों की भीड़ बढ़ती है और बीमारियों का खतरा भी।

एयरपोर्ट के पास पूरी तरह पाबंदी

एयरपोर्ट के आसपास कबूतरों को दाना खिलाने वाले स्टेशन बनाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि पक्षियों की वजह से फ्लाइट की सुरक्षा और एयरपोर्ट के कामकाज पर कोई असर न पड़े।

जागरूकता अभियान चलाने की योजना

इन गाइडलाइंस को असरदार तरीके से लागू करने के लिए स्थानीय निकायों को बैनर, सूचना बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इन अभियानों के जरिए लोगों को कबूतरों को दाना खिलाने से होने वाले स्वास्थ्य खतरों के बारे में बताया जाएगा और नए नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मकसद लोगों की सेहत की सुरक्षा करना है

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि इन गाइडलाइंस का इरादा पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना है। हर कहीं दाना खिलाने की इजाजत देने के बजाय इसे नियंत्रित करके, अधिकारी सांस की बीमारियों का खतरा कम करना चाहते हैं और पूरे बेंगलुरु में साफ-सफाई को बेहतर बनाना चाहते हैं।