बेंगलुरु के एक कपल ने ₹50,000 किराया देने के बजाय EMI पर घर खरीदा। उन्होंने किराए को खर्च और EMI को संपत्ति बनाने वाला निवेश माना। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने 3 BHK घर चुना, जिससे ऑनलाइन बहस छिड़ गई।

बड़े शहरों में बढ़ते किराए, EMI और लंबी अवधि की फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर एक ऑनलाइन बहस छिड़ गई है। इसकी वजह बना है बेंगलुरु का एक कपल, जिसने किराया देने के बजाय अपना घर खरीदने का फैसला किया। ये कपल हर महीने करीब 50,000 रुपये किराया दे रहा था। इसी खर्चे ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या किराए पर रहना सही है या फिर अपना घर खरीद लेना चाहिए। बाद में, उन्होंने अपना पहला घर फाइनल करने से पहले सोची गई बातों को सबके साथ शेयर किया।

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रजनी नाइक नाम की महिला ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने और उनके पार्टनर ने घर खरीदने से पहले अपनी सबसे जरूरी चीजों की लिस्ट बनाई। उन्होंने बताया कि घर में अच्छी रोशनी और हवा का आना उनके लिए बहुत जरूरी था, क्योंकि वे पहले भी ऊंची इमारतों वाले फ्लैट्स में रह चुके थे और जानते थे कि इन चीजों का रोजमर्रा की जिंदगी पर कितना असर पड़ता है। इसके अलावा, उन्होंने नए और पुराने (सेकंड हैंड) घरों की तुलना की। कई ऑप्शन देखने के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे कि भले ही पुराने घर शुरुआत में सस्ते लगें, लेकिन लंबे समय में नए फ्लैट की वैल्यू ज्यादा बेहतर होती है। साथ ही, बिल्डर पर भरोसा भी उनके लिए एक अहम फैक्टर बन गया।

उनके फैसले में सबसे बड़ा रोल था किराए और EMI की तुलना। उनका मानना था कि हर महीने 50,000 रुपये किराया देने से उनके भविष्य के लिए कुछ भी नहीं जुड़ रहा था। वहीं, EMI भले ही शुरुआत में थोड़ी ज्यादा और तनावपूर्ण लगे, लेकिन धीरे-धीरे यह उन्हें एक घर का मालिक बना देगी। उन्होंने भविष्य की जरूरतों, जैसे परिवार वालों का आना-जाना और लाइफस्टाइल में बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपना प्लान 2 BHK से बदलकर एक कॉम्पैक्ट 3 BHK कर लिया।

देखिए वायरल वीडियो

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सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

इस पोस्ट पर यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। एक यूजर ने लिखा, “किराए बनाम EMI वाली बात एकदम सही कही। इसके अलावा, बैंगलोर में कई इलाकों में किराया पहले से ही EMI के बराबर पहुंच रहा है, और कुछ मामलों में तो यह EMI से भी ज्यादा हो गया है।”

एक अन्य ने कहा, “मैं अपनी जिंदगी की क्वालिटी और स्टैंडर्ड से समझौता नहीं करती। मैं जिस जगह रहती हूं, वहां मुझे नाखुश नहीं रहना चाहिए।” एक और शख्स ने लिखा, “मेरे लिए अपार्टमेंट के पास मेट्रो स्टेशन होना बहुत जरूरी था, क्योंकि मैं कार नहीं चला सकता।”