बेंगलुरु में 8वीं की छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या की। सुसाइड नोट में 20 रुपये जुर्माना, TC की धमकी और शिक्षकों पर परेशान करने के आरोप, पुलिस जांच जारी।
Bengaluru School Girl Suicide: बेंगलुरु का अनेकल इलाका बुधवार की रात अचानक एक ऐसी चीख से दहल उठा, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मारसुरू सरकारी हाई स्कूल की 8वीं क्लास में पढ़ने वाली एक मासूम छात्रा ने रात के करीब 12:30 बजे अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पुलिस को शव के पास से जो सुसाइड नोट मिला, उसकी इबारत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। नोट में लिखा था कि सिर्फ 'होमवर्क' पूरा न होने की वजह से टीचर ने उसे न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उस पर ₹20 का जुर्माना भी ठोक दिया। इतना ही नहीं, उसे स्कूल से निकालने (ट्रांसफर सर्टिफिकेट यानी टीसी देने) की ऐसी खौफनाक धमकी दी गई कि वह खौफ के उस दलदल में धंसती चली गई, जहां से लौटने का कोई रास्ता नहीं था।
"वह बीमार मां से भी छुपा गई अपना दर्द..." एक लाचार परिवार की अनसुनी चीख
जिस वक्त यह मासूम स्कूल में मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रही थी, उसकी मां अस्पताल के बिस्तर पर अपनी बीमारी से जंग लड़ रही थी। दुखी मां ने रोते हुए बताया, "शिक्षकों ने उसे बहुत परेशान किया। मैं बीमार थी और अस्पताल में भर्ती थी, इसलिए उसने मुझे कभी नहीं बताया कि वह स्कूल में किन बदतर हालात से गुज़र रही थी। शायद उसने अपनी बहन से कुछ कहा हो, लेकिन मुझे भनक तक नहीं लगी।" पुलिस ने फिलहाल अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है। अधिकारी अब सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की जांच कर रहे हैं और क्लास के अन्य बच्चों, स्कूल स्टाफ व परिवार के बयान दर्ज कर 'सफेदपोश' गुनहगारों तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं।
क्या जॉगिंग करते वक्त मौत हुई या पीटी टीचर ने बरसाई थीं लाठियां?
अनेकल की यह घटना अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि बेंगलुरु नॉर्थ के एक नामी रेसिडेंशियल स्कूल की एक और खौफनाक दास्तान सामने आ गई। इसी हफ्ते की शुरुआत में, छठी क्लास के एक 12 साल के मासूम बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। स्कूल प्रशासन ने कैमरे के सामने आकर बेहद सफाई से इसे एक 'हादसा' बताया और दावा किया कि कैंपस में जॉगिंग करते समय लड़का अचानक गिर गया था। लेकिन, बच्चे के शरीर पर मौजूद निशानों ने स्कूल के झूठ की धज्जियां उड़ा दीं। परिवार का सीधा आरोप है कि मौत से ठीक पहले स्कूल के पीटी (PE) टीचर ने बच्चे को बेरहमी से पीटा था। परिजनों के भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार पुलिस ने आरोपी पीटी टीचर के खिलाफ शारीरिक शोषण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था? 20 रुपये जुर्माने और TC की धमकी का आरोप
पुलिस के अनुसार, छात्रा द्वारा छोड़े गए कथित नोट में होमवर्क पूरा नहीं करने को लेकर एक शिक्षक द्वारा सजा दिए जाने का जिक्र है। छात्रा ने आरोप लगाया कि उस पर 20 रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) देने की धमकी भी दी गई। नोट में कथित तौर पर लिखा गया कि इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। हालांकि, पुलिस अभी नोट की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि स्कूल में छात्रा के साथ वास्तव में क्या हुआ था और क्या वह लंबे समय से किसी तरह के दबाव या उत्पीड़न का सामना कर रही थी।
जयपुर से बेंगलुरु तक: क्या बंद कमरों में घुट रहा है हमारे बच्चों का दम?
यह केवल बेंगलुरु की कहानी नहीं है। कुछ समय पहले जयपुर में भी एक 9 साल की मासूम बच्ची ने बुलीइंग (उत्पीड़न) से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद हालांकि पुलिस ने प्रिंसिपल और क्लास टीचर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी न्याय के लिए भटक रहा है क्योंकि आरोप बेहद हल्के हैं। चाहे जयपुर की घटना हो या बेंगलुरु के ये दो ताजा मामले, ये साफ तौर पर इशारा करते हैं कि आज के शैक्षणिक संस्थान बच्चों के लिए 'सुरक्षित पनाहगाह' बनने के बजाय 'टॉर्चर चैंबर' में तब्दील होते जा रहे हैं।
खामोश चीखें और दम तोड़ता मानसिक स्वास्थ्य: अब जवाबदेही किसकी?
इन दर्दनाक हादसों ने स्कूलों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर एक बेहद गंभीर बहस छेड़ दी है। पढ़ाई का बेहिसाब दबाव, शिक्षकों का अमानवीय व्यवहार और हॉस्टलों में होने वाला उत्पीड़न बच्चों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। बच्चे अक्सर इस डर से चुप रहते हैं कि समाज या उनके माता-पिता क्या कहेंगे। शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अब समय आ गया है जब हर स्कूल में एक अनिवार्य और मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली (काउंसलिंग) लागू की जाए, जहां बच्चे बिना किसी खौफ के अपनी बात कह सकें। पुलिस का कहना है कि दोनों ही मामलों की गहराई से तफ्तीश की जा रही है और रिपोर्ट आते ही सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कार्रवाई उन मांओं की गोद को दोबारा भर पाएगी?


