भरत तिवारी एनकाउंटर और राजगीर मॉब लिंचिंग मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। जानिए उन्होंने क्या मांग की, तेजस्वी यादव ने क्या कहा और बिहार की सियासत में क्यों मचा है बवाल।

बिहार में चर्चा का विषय बने भरत तिवारी एनकाउंटर और राजगीर में भीड़ हिंसा के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर दोनों मामलों की जानकारी दी। चिराग ने गृह मंत्री से निष्पक्ष जांच कराने और पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि बिहार में हाल के दिनों में हुई गंभीर घटनाओं को लेकर उन्होंने गृह मंत्री को विस्तार से अवगत कराया।

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अमित शाह के सामने उठाया भरत तिवारी एनकाउंटर का मुद्दा

चिराग पासवान ने गृह मंत्री अमित शाह को भोजपुर जिले के भरत तिवारी एनकाउंटर और नालंदा के राजगीर में पासवान समाज के दो युवकों की भीड़ द्वारा हत्या की घटना की जानकारी दी। उन्होंने दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की मांग की।

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भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से ही बिहार सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष के साथ-साथ सरकार के भीतर से भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए गए हैं। मामला तब और चर्चा में आया जब राज्य सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने सार्वजनिक रूप से पूछा कि यदि भरत तिवारी के बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए थे, तो फिर एसटीएफ की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई।

सरकार और विपक्ष के बीच तेज हुई सियासत

इस मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव भी लगातार बिहार सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को पुलिस मुख्यालय से हटाकर नई जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े करता है। तेजस्वी यादव का कहना है कि सरकार इस पूरे मामले में ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिक कदम उठा रही है। उन्होंने इसे सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया।

जांच और न्याय की मांग हुई तेज

भरत तिवारी एनकाउंटर और राजगीर की घटना को लेकर अब राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर चिराग पासवान ने केंद्र स्तर पर मामले को उठाया है, वहीं विपक्ष भी लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अब नजर इस बात पर है कि बिहार सरकार और जांच एजेंसियां इन मामलों में आगे क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल दोनों घटनाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग और तेज हो गई है।