मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा समग्र बैठक में नमन मिशन, अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान, नर्मदा परिक्रमा मार्ग को अतिक्रमण मुक्त बनाने और नदी संरक्षण के लिए बड़े फैसलों का ऐलान किया।

मध्य प्रदेश सरकार ने मां नर्मदा के संरक्षण और नर्मदा घाटी के समग्र विकास के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा समग्र की बैठक में साफ कहा कि नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी की जीवनरेखा है। सरकार अब इसे निर्मल, अविरल और अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए स्थायी और समयबद्ध योजना पर काम करेगी। खास बात यह है कि अब हर महीने नर्मदा समग्र की समीक्षा बैठक होगी, ताकि योजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।

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नर्मदा संरक्षण के लिए बनेगा 'नमन मिशन'

बैठक में बताया गया कि मां नर्मदा के जल को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के लिए 'नमन मिशन' तैयार किया गया है। यह मिशन नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास का प्रमुख माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसकी साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। मिशन के संचालन में जल संसाधन, वन, पर्यावरण, कृषि, पर्यटन, नगरीय विकास समेत कई विभागों की भागीदारी होगी। इसके लिए हर वर्ष 100 करोड़ रुपये के राज्य अनुदान का प्रस्ताव रखा गया है। वर्ष 2026-27 का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है।

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नर्मदा परिक्रमा मार्ग होगा अतिक्रमण मुक्त

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त किया जाए। परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए संकेतक, मूलभूत सुविधाएं और जरूरत वाले स्थानों पर दीनदयाल रसोई शुरू करने की तैयारी भी की जाएगी। नर्मदा तट पर स्थित धार्मिक स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाने और घाटी क्षेत्र के किसानों को नकदी फसलों के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर भव्य आयोजन होंगे, जिनमें आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी और जनजागरूकता अभियान शामिल रहेंगे।

अमरकंटक से ओंकारेश्वर तक विकास पर जोर

सरकार ने अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान स्थापित करने की योजना भी बनाई है, जिसके लिए 32 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वन विभाग नर्मदा घाटी क्षेत्र में 415 हेक्टेयर भूमि पर 2.70 लाख पौधे लगाएगा।

इसके अलावा नर्मदा किनारे बसे 21 शहरों में 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। ओंकारेश्वर के विकास के लिए स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) बनाने की तैयारी है, जबकि महेश्वर और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से नर्मदा घाटी में पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को एक साथ मजबूती मिलेगी।