Budget Speech Records: भारत के वित्त मंत्रियों के वो अनोखे रिकॉर्ड जो आज भी चौंकाते हैं?
Budget 2026: भारत के बजट भाषण सिर्फ घोषणाएं नहीं, इतिहास रचते हैं। 2 घंटे 42 मिनट का रिकॉर्ड, 800 शब्दों का सबसे छोटा भाषण और 18,650 शब्दों का सबसे भारी बजट-Budget 2026 से पहले सवाल यही है, क्या इस बार कोई नया रिकॉर्ड टूटेगा या कहानी फिर बदलेगी?

Union Budget History Indian Finance Ministers: हर साल 1 फरवरी को देश की निगाहें संसद पर टिक जाती हैं। केंद्रीय बजट सिर्फ टैक्स, सब्सिडी और योजनाओं का एलान नहीं होता, बल्कि यह उस सरकार की सोच और दिशा का आईना भी होता है। Budget 2026 को लेकर भी यही उत्सुकता है, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे लगातार नौवीं बार पेश करने जा रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के बजट भाषणों का इतिहास अपने आप में कितना दिलचस्प और हैरान करने वाला रहा है?
क्या भारत का सबसे लंबा बजट भाषण भी रिकॉर्ड बना गया था?
भारत के संसदीय इतिहास में सबसे लंबा बजट भाषण साल 2020 में देखने को मिला। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 पर करीब 2 घंटे 42 मिनट तक भाषण दिया। यह आज तक का सबसे लंबा बजट भाषण माना जाता है। इस भाषण में नई इनकम टैक्स व्यवस्था, LIC IPO जैसे बड़े ऐलान किए गए। हालांकि लंबा भाषण देते-देते उनकी तबीयत बिगड़ गई और लोकसभा अध्यक्ष को आखिरी दो पन्ने पढ़ने पड़े। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले 2019 में भी उनका भाषण 2 घंटे 17 मिनट का था।
हीरुभाई एम पटेल: सबसे छोटा केंद्रीय बजट भाषण
सबसे छोटा केंद्रीय बजट भाषण हीरुभाई एम पटेल ने 1977-78 वित्तीय वर्ष के दौरान दिया था। मोरारजी देसाई सरकार में सेवा करते हुए, पटेल ने केवल लगभग 800 शब्दों का अंतरिम बजट भाषण दिया था, जो भारत के इतिहास में सबसे छोटा बजट भाषण बना हुआ है।
मनमोहन सिंह: शब्दों में सबसे लंबा बजट किसने पढ़ा?
अगर समय नहीं, बल्कि शब्दों की संख्या की बात करें, तो यह रिकॉर्ड मनमोहन सिंह के नाम है। 1991 में वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने 18,650 शब्दों का बजट भाषण दिया था। इसी बजट ने भारत में आर्थिक सुधारों की नींव रखी। इसके बाद दूसरा स्थान अरुण जेटली के 2018 के बजट भाषण का है, जिसमें 18,604 शब्द थे।
अरुण जेटली: शब्दों की संख्या के हिसाब से दूसरा सबसे लंबा बजट भाषण
शब्दों की संख्या के हिसाब से दूसरा सबसे लंबा बजट भाषण अरुण जेटली ने 2018 में दिया था। उनके बजट भाषण में 18,604 शब्द थे, जो इसे मनमोहन सिंह के 1991 के रिकॉर्ड से ठीक पीछे रखता है।
क्या बजट भाषण का अंदाज़ बदल गया है?
समय के साथ बजट भाषणों का लहजा और विषय दोनों बदले हैं। पहले भाषण बेहद तकनीकी होते थे, लेकिन अब सरकारें इसे आम जनता से जोड़ने की कोशिश करती हैं। Budget 2026 भी सिर्फ घोषणाओं का नहीं, बल्कि आने वाले आर्थिक रोडमैप का संकेत माना जा रहा है।
Budget 2026 क्यों है खास?
क्योंकि यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट भाषण होगा-जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। अब सवाल यह है कि क्या यह भाषण भी इतिहास में किसी नए कारण से याद किया जाएगा?
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