CEC Gyanesh Kumar : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए INDIA गठबंधन ने मोर्चा खोल दिया है। तमाम विपक्षी दल कश्मीर से कन्याकुमारी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन CEC को हटाना आसान नहीं है। तो आइए जानते हैं इसका नियम क्या है और संसद से लेकर राष्ट्रपति तक इसमें कौन-कौन से कदम शामिल होते हैं?

नई दिल्ली. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध तेज कर दिया है। INDIA गठबंधन से जुड़े दल देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष की ओर से 2 अक्टूबर से देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की भी बात कही गई है। हालांकि, किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना इतना आसान नहीं है। इसके लिए संविधान में एक खास और लंबी प्रक्रिया तय की गई है। CEC को सामान्य प्रशासनिक आदेश के जरिए पद से नहीं हटाया जा सकता।

क्यों CEC को साधारण आदेश से नहीं हटाया जा सकता

बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमा को हटाने के लिए विपक्ष का विरोध करना या सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है। क्योंकि उनको संविधान का अर्टिकल 324(5) विशेष सुरक्षा देता है।

2. CEC को कौन हटा सकता है?

“ज्ञानेश कुमार को हटाना इसलिए आसान नहीं है क्योंकि CEC को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी संवैधानिक प्रक्रिया और संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होती है।

3. सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी प्रक्रिया

अन्य चुनाव आयुक्तों (ECs) को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा सीधे हटाया जा सकता है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को केवल संसद के माध्यम से (महाभियोग जैसी जटिल प्रक्रिया से) ही हटाया जा सकता है।

4. संसद में प्रस्ताव लाना पड़ेगा?

चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश करना होता है । प्रस्ताव पेश करने के लिए न्यूनतम सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। प्रस्ताव लाने के लिए संसद के संबंधित सदन में निर्धारित संख्या में सांसदों का समर्थन चाहिए।

दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए

  • CEC को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पास होने के बाद और संसद की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही राष्ट्रपति CEC को पद से हटाने की कार्रवाई करते हैं।
  • चुनाव आयोग को राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र रखने के उद्देश्य से CEC के लिए यह सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। वर्तमान कानून में CEC का कार्यकाल अधिकतम 6 साल या 65 वर्ष की उम्र तक, जो पहले हो, है।