CJI सूर्यकांत के कानून-व्यवस्था वाले बयान पर कांग्रेस ने निशाना साधा। जानिए CJP प्रदर्शन, INDIA गठबंधन की मांग और विपक्ष को लिखे पत्र में क्या कहा गया।
कांग्रेस ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत को लेकर एक ट्वीट किया है, जिसमें उसने साफ कहा है कि अगर कानून-व्यवस्था संभालना आपके बस की बात नहीं तो इस्तीफा दे दें। कांग्रेस की यह टिप्पणी जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने दिल्ली में हाल के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले को कानून-व्यवस्था का विषय बताते हुए इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं करने के कारण भी बताए थे।
क्या है कांग्रेस का ट्वीट?
केरल कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया हैंडल X पर लिखा गया, डियर सूर्यकांत! अगर कानून-व्यवस्था संभालना आपके बस की बात नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ले आएंगे जो इसे संभाल सके।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन पर क्या बोले CJI सूर्यकांत?
- भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों के कारण पैदा हुई स्थिति उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। जब पत्रकारों ने उनसे राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध प्रदर्शनों और वहां लगाई गई पाबंदियों के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने कहा, “यह कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। यह मेरा विषय नहीं है।”
- जस्टिस सूर्यकांत दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की 33वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की।
विपक्षी नेताओं से मिलने की मांग पर CJI ने क्या कहा?
- INDIA गठबंधन के विरोध मार्च और विपक्षी नेताओं की ओर से मुलाकात का समय मांगे जाने पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं।
- हालांकि, उन्होंने चुनाव में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में नेताओं को याचिका दायर करके अदालत का रुख करना चाहिए, क्योंकि संबंधित मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
- जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि उन्हें सोमवार को मुलाकात के अनुरोध से संबंधित एक पत्र मिला था। उन्होंने कहा, “मुझे कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र मिला था, और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था। मैंने उसमें उन कारणों का जिक्र किया था, जिनकी वजह से मैं उनसे नहीं मिल पाऊंगा।”
- मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा, "सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या चुने हुए प्रतिनिधि की याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का रुख करने का अधिकार है, और हम उनकी बात सुनेंगे तथा कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।"
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को लिखे पत्र पर क्या कहा?
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लिखे गए उस पत्र के बारे में जब मुख्य न्यायाधीश से सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने मुलाकात करने से इनकार किया था, तो उन्होंने कहा कि वह पत्र की गोपनीयता बनाए रखेंगे। हालांकि, बाद में कांग्रेस ने इस पत्र को अपने X अकाउंट पर सार्वजनिक रूप से साझा कर दिया।
CJI सूर्यकांत ने पत्र में शक्तियों के बंटवारे का किया जिक्र
- मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने अपने दो पन्नों के पत्र में विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं करने के पीछे संवैधानिक और न्यायिक कारण बताए।
- उन्होंने लिखा, "सबसे पहले, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जिन मुद्दों का जिक्र किया गया है, वे पहले से ही भारत के सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
- इसलिए, लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाना 'शक्तियों के बंटवारे' (Separation of Powers) के सिद्धांत का पूरी तरह से उल्लंघन होगा। यह सिद्धांत भारत के संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का एक अहम हिस्सा है। ऐसा करना स्थापित नैतिकता और न्यायिक मर्यादा के भी खिलाफ होगा।"
- उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट को विपक्षी नेताओं के पत्र में उठाए गए मुद्दों से निपटने के लिए कोई प्रशासनिक अधिकार नहीं दिए गए हैं।
अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करने की सलाह
- अपने पत्र में मुख्य न्यायाधीश ने संविधान के अनुच्छेद 32 का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) समेत व्यापक न्यायिक अधिकार हैं।
- इन अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अदालत भारतीय नागरिकों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के प्रमुख पहलुओं पर न्यायिक रूप से विचार करने के लिए बाध्य है।
- उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पक्ष पर ज्ञापन सौंपने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करना ज्यादा उचित होगा।
- यानी, जिन मुद्दों पर विपक्षी नेता ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं, उन्हें लेकर अदालत में याचिका दायर करना सही प्रक्रिया होगी।
13 अक्टूबर को होनी है समान मुद्दों वाले मामलों की सुनवाई
- जस्टिस सूर्यकांत ने पत्र में यह भी बताया कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को होनी है।
- उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे सोमवार को अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच व्यक्तिगत रूप से याचिका जमा करने का विकल्प उपलब्ध है।
- इसके अलावा, ई-फाइलिंग की सुविधा का इस्तेमाल करके किसी भी दिन और किसी भी समय याचिका दाखिल की जा सकती है।
- मुख्य न्यायाधीश ने भरोसा दिलाया कि ऐसी किसी भी याचिका पर कानून के अनुसार जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।
- इस तरह, जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं से व्यक्तिगत मुलाकात करने के बजाय अदालत की निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत मामले को उठाने की सलाह दी।
- वहीं, कांग्रेस ने उनके कानून-व्यवस्था संबंधी बयान पर सवाल उठाते हुए तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है।


