विपक्षी सांसदों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को पत्र लिखकर उनको ज्ञापन सौंपने और मुलाकात का समय मांगा था। लेकिन सीजेआई ने मिलने से इनकार कर दिया था। इसको लेकर वह चर्चा में बने हुए हैं। तो आइए जानते हैं कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत, कब रिटायर होंगे और उनके करियर के 5 बड़े फैसले कौन से हैं।

नई दिल्ली.  भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत देश की सर्वोच्च अदालत के जज हैं। हरियाणा के हिसार से अपना कानूनी सफर शुरू करने वाले सूर्यकांत ने जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया है। वे संविधान, नागरिकता, चुनाव और श्रम कानून जैसे अहम मामलों में सुनवाई करने वाली पीठों का हिस्सा रहे हैं। उनका कार्यकाल भी अब कुछ महीनों का बाकी है। आइए जानते हैं जस्टिस सूर्यकांत की पूरी प्रोफाइल?

कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था। उन्होंने 1984 में कानून की पढ़ाई पूरी की और उसी साल जिला अदालत, हिसार में वकालत शुरू की। साल 2000 में वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल बने। 2004 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए। इसके बाद 2018 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने और 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश की शपथ ली।

कब रिटायर होंगे जस्टिस सूर्यकांत?

जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे। 12 अक्टूबर 2026 के हिसाब से उनका कार्यकाल करीब चार महीने बाकी है।

जस्टिस सूर्यकांत के 5 चर्चित फैसले

1. बिहार में मतदाता सूची का मामला

मई 2026 में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वैध माना। अदालत ने चुनाव आयोग के अधिकार और प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर विचार किया।

2. असम में नागरिकता का मामला

अक्टूबर 2024 में पांच जजों की संविधान पीठ ने नागरिकता कानून की धारा 6A को वैध माना। यह प्रावधान असम समझौते के तहत असम आए कुछ प्रवासियों की नागरिकता से जुड़ा है। जस्टिस सूर्यकांत इस पीठ का हिस्सा थे।

3. श्रम कानून की परिभाषा पर फैसला

2026 में नौ जजों की संविधान पीठ ने तय किया कि किसी संस्थान को औद्योगिक विवाद कानून के तहत ‘उद्योग’ मानने के लिए पहले से तय कसौटी लागू रहेगी। जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले में कुछ बदलावों की जरूरत पर अपनी राय दी, लेकिन इस प्रस्ताव को बाकी जजों का समर्थन नहीं मिला।

4. जज बनने के लिए वकालत के अनुभव का मामला

2026 में सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनने के लिए वकालत के अनुभव की अनिवार्य अवधि तीन साल से घटाकर एक साल कर दी। जस्टिस सूर्यकांत ने बहुमत का फैसला लिखा।

5. अफजाल अंसारी की सदस्यता का मामला

2023 में जस्टिस सूर्यकांत उस पीठ का हिस्सा थे जिसने अफजाल अंसारी की दोषसिद्धि पर अंतरिम रोक लगाई और कुछ शर्तों के साथ उनकी सांसद के रूप में सदस्यता बहाल रहने की अनुमति दी।

क्यों चर्चा में हैं?

जस्टिस सूर्यकांत के फैसले चुनावी प्रक्रिया, नागरिकता और कानून की व्याख्या जैसे मुद्दों से जुड़े हैं। उनके कार्यकाल के अंतिम महीनों में भी सुप्रीम कोर्ट के कई अहम मामलों पर देश की नजर रहेगी। वह विपक्षी नेताओं और सांसदों के साथ मुलाकात के वक्त और राहुल गांधी के लिखे लेटर के कारण फिलहाल चर्चा में हैं।