2 फरवरी 2016 को डालो एयरलाइंस की फ्लाइट में लैपटॉप बम से धमाका हुआ। इस आत्मघाती हमले में केवल हमलावर मारा गया और 74 यात्री बच गए। असल निशाना टर्किश एयरलाइंस थी, जिसकी फ्लाइट रद्द हो गई थी।

मोगादिशु: ठीक एक दशक पहले, 2 फरवरी 2016 को दुनिया को दहला देने वाले डालो एयरलाइंस के विमान में हुए बम धमाके की खौफनाक यादों को 10 साल पूरे होने वाले हैं। सोमालिया की राजधानी मोगादिशु से जिबूती जा रही फ्लाइट में लैपटॉप बम का इस्तेमाल करके यह आत्मघाती हमला किया गया था। लेकिन किस्मत का करिश्मा देखिए, 74 यात्री बच गए और मारा गया तो सिर्फ हमलावर।

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यह हमला अब्दुल्लाही अब्दिसलाम बोरले नाम के एक सोमाली नागरिक ने किया था। वह विस्फोटक छिपाए हुए एक लैपटॉप के साथ विमान में चढ़ा था। सीएनएन ने रिपोर्ट किया था कि उसने पहले से ही वह सीट और जगह चुन ली थी, जिससे विमान को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाया जा सके।

धमाका विमान के उड़ान भरने के 15 मिनट बाद हुआ। उस वक्त विमान करीब 11,000 फीट की ऊंचाई पर था। चूंकि विमान का केबिन प्रेशर पूरी तरह से स्थिर नहीं हुआ था, इसलिए धमाके से विमान के साइड में एक मीटर बड़ा छेद हो गया। धमाके के झटके से हमलावर विमान से बाहर गिर गया और मारा गया। पायलट की सूझबूझ की वजह से विमान को तुरंत मोगादिशु में इमरजेंसी लैंडिंग कराने में कामयाबी मिली।

निशाने पर थी टर्किश एयरलाइंस

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह हमला असल में डालो एयरलाइंस पर नहीं होना था। उस दिन तेज हवाओं के कारण टर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट रद्द हो गई थी, जिसके बाद उसके 74 यात्रियों को डालो एयरलाइंस में शिफ्ट कर दिया गया था। हमलावर ने भी शुरू में टर्किश एयरलाइंस का ही टिकट लिया था।

आतंकी संगठन अल-शबाब ने बाद में साफ किया कि उनका निशाना पश्चिमी अधिकारी और तुर्की के सैनिक थे। इस धमाके के पीछे शामिल दो लोगों को सोमालिया की एक सैन्य अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले में शामिल 8 अन्य लोगों को भी अलग-अलग अवधि की जेल की सजा मिली।